राष्ट्र सेविका समिति का विभाग एकत्रीकरण में हुआ शारीरिक प्रदर्शन

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सेविका समिति की राष्ट्रीय प्रमुख कार्यवाहिका का मिला मार्गदर्शन

नागौर // राष्ट्र सेविका समिति का नागौर विभाग का शाखा एकत्रीकरण संपन्न हुआ। शारदा बालिका निकेतन के खेल परिसर में आयोजित यह एकत्रीकरण नागौर गाइड उप प्रधान श्रीमती अनिता गहलोत के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सुनीता गुप्ता के द्वारा की गई। कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय प्रमुख कार्यवाहिका अन्नदानम सीता गायत्री का बौद्धिक पाथेय प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति द्वारा शारीरिक कार्यक्रम में आसन, घोष के साथ-साथ बिना अस्त्र-शस्त्र के युद्ध नियुद्ध की कला का प्रदर्शन किया गया जिसमें भूमि वंदन सहित अनेक प्रयोग हुए। साथ ही दंड योग व लघु दंड (यष्टि) प्रदर्शन का शारीरिक अभ्यास भी हुआ जिसमें घात, प्रतिघात, प्रहार व प्रतिरोध के प्रयोग बताए गए। शारीरिक कार्यक्रम में घेाषवादन का प्रस्तुतीकरण भी हुआ जिसमें पण्णव, वंशी, झांझ व त्रिभुज आदि भारतीय वाद्यों के द्वारा भारतीय शास्त्रीय रचना किरण, उदय व भूप आदि भी बजाए गए। घोष के साथ ही गलत मत कदम उठाओ, विचार कर चलो, सोच कर चलो गीत पर गण समता का भी प्रत्यक्षीकरण हुआ।

सुप्त हुई शक्तियों को जगाने का काम सदैव मातृशक्ति ने किया है

इस अवसर पर प्रमुख कार्यवाहिका ने कहा कि मकर संक्रांति को परिवर्तन व गतिशीलता के प्रमाण का पर्व मानते हैं। समाज में परिवर्तन व शक्ति जागरण का कार्य तथा कभी तेजस रही व बाद में सुप्त हुई शक्तियों को जगाने का कार्य सदैव मातृशक्ति ने किया है। वामन अवतार के समय भी ऋषि कश्यप व माता अदिति ने ब्रह्म व क्षात्र तेज को पुनः जागृत करने का कार्य किया। साक्षात भगवान को भी अपनी कोख में धारण करने की क्षमता भारतीय नारियों में रही है। इसलिए समाज में चैतन्य जगाने व ब्रह्म तेज को जागृत कार्य करने का कार्य भी नारी शक्ति के द्वारा किया गया। उन्होंने राष्ट्र सेविका समिति व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा अपेक्षित पंच परिवर्तन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। आज के समय में परिवार में बालिकाओं के विवाह के बाद तारतम्य में कमी आने का एक कारण मां द्वारा अपनी संतति को अपेक्षित विचार न देने का भी कारण रहा है जिसमें मोबाइल की नकारात्मक भूमिका भी अधिक है। पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आज जल, जमीन व जंगल को सुरक्षित करने की अत्यंत आवश्यकता है। वर्तमान में प्रयागराज में चल रहे महा कुंभ को प्रदूषण मुक्त बनाने की दृष्टि से एक थैला व एक थैली अभियान चलाया गया है। पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी हम सब की है। इस दृष्टि से मातृशक्ति को अपनी भूमिका का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विस्मृति के स्थान पर स्व बोध कराने के लिए आवश्यक है कि हम मुगल व अंग्रेज काल के समय शिक्षा के माध्यम से अपने गौरवमय अतीत को निम्नतर बताने के भ्रम से निकलें। राणा प्रताप का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि चेतन ने प्रताप की रक्षा के लिए प्राणोत्सर्ग किया। आज उदयपुर के सामान्य वाहन चालक को भी इस गौरव का भान है कि यह मिट्टी मेरे पूर्वजों के रक्त से परिपूर्ण है। शिक्षा पूर्ण होने व मनी पैकेज पाने के बाद आगे कुछ न करने की मानसिकता अपने तेज व स्व को विस्मृत कर देने जैसा है। उन्होंने कहा कि संगठित व शक्तिशाली हिंदू संगठन के माध्यम से ही शक्तिशाली व समर्थ राष्ट्र का निर्माण करने का दायित्व नारी शक्ति पर है। शक्ति व समरसता के माध्यम से समाज प्रकाशवान व गतिमान करने का दायित्व हम पर ही है। यह वैभवपूर्ण स्थिति डॉ. हेडगेवार जी के अनुसार हमारे जीवन काल में ही हमें प्राप्त हो ऐसा प्रयास हमें करना चाहिए।

कार्यक्रम में नागौर विभाग कार्यवाहिका मीना श्रीमाली ने आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर राजस्थान क्षेत्र कार्यवाहिका प्रमिला शर्मा, जोधपुर प्रांत कार्यवाहिका श्रीमती सुमन रावलोत, प्रांत प्रचारिका रितु शर्मा, डीडवाना जिला कार्यवाहिका सुमन शेखावत, मेड़ता जिला कार्यवाहिका कांता शर्मा व नागौर जिला कार्यवाहिका श्रीमती इंदुमति चौधरी सहित अनेक मातृशक्ति की उपस्थिति रही। बौद्धिक से पूर्व काव्य गीत केसरी बाना सजाएं, वीर का श्रंगार कर। लें चले हम राष्ट्रनौका, को भंवर से पार कर भी सुमधुर रूप से गया गया।