

राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र में हिन्दी कार्यशाला का आयोजन
बीकानेर // राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, बीकानेर परिसर पर आज हिन्दी कार्यशाला का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केंद्र के प्रभागाध्यक्ष डॉ एस सी मेहता ने कहा की हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए दिखावा नहीं दिल से प्रयास करें एवं यह तभी संभव होगा जब आप उसका दिल से सम्मान करेंगे। उन्होंने कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया की जब तक आपका जनता से जड़ाव नहीं होगा, तब तक आपके कार्य को उचित पहचान नहीं मिलेगी । उन्होंने बताया की वह शीघ्र इस केंद्र की पहली राजभाषा पत्रिका का विमोचन करवाने जा रहा है जिसमें बीकानेर के तीस से अधिक साहित्यकारों के राज भाषा को बढ़ावा देने पर व्यक्त किए गए विचारों का सम्मिलित किया गया है । उन्होंने यह भी बताया की यह केंद्र समय समय पर अश्व पलकों के साथ हिंदी में कार्यक्रम करता रहता है जिससे यहाँ के शौध आम जनता तक पहुँचते हैं।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त कर्नल महेंद्र सिंह ने कहा कि जब तक आप जनता से संवाद स्थापित नहीं करेंगे आप के कार्यों को सिर्फ आपके विभाग के कुछ लोग ही जानेंगे, लेकिन जब आप जनता से जुड़ेंगे तो आपके कार्य एवं संस्थान के बारे में आम लोग जान पाएंगे। आज आवश्यकता है हमें अपने आपको सीमित दायरे से बाहर निकालने की। उन्होंने इस अवसर पर अपने जीवनकाल के अश्वों से सम्बंधित संस्मरण भी साझा किये।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद आचार्य ने “हिंदी के अखबारों में बढ़ता अंग्रेजी का प्रयोग, कितना उचित कितना अनुचित” विषय पर बहुत ही गंभीरता से अपने विचार रखे। उन्होंने इस अवसर पर भारतेन्दु हरिश्चंद्र एवं मीरा बाई के योगदान को विशेष रूप से उल्लेखित किया। उन्होंने बताया की हिंदी तो खुशबु की तरह है जो दिखाई दे या नहीं हर जगह फ़ैल जाती है। इस अवसर पर उन्होंने अपनी पुस्तक “यूनिक बीकाणा” के कुछ अंश भी श्रोताओं से साझा किए। आज के कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार रमेश बिस्सा ने भी भाग लिया। आज के कार्यक्रम की रूपरेखा परिसर के राजभाषा अधिकारी सत्यनारायण पासवान ने बनाई । कार्यक्रम का संचालन सुहेब कुरेशी ने किया एवं कार्यक्रम में डॉ रमेश, डॉ राव , डॉ कुट्टी , डॉ जितेन्द्र सिंह एवं केंद्र के अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।



