



बीकानेर // विश्व मित्रता दिवस के अवसर पर रविवार को एक ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। मल्टी स्किल डेवलपमेंट एसोसिएशन के सौजन्य से “विश्व मित्रता दिवस का महत्व” विषय पर आयोजित इस काव्य गोष्ठी का संयोजन एसोसिएशन के सी ई ओ और पूर्व प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी ने किया।
उन्होंने बताया कि इस काव्य गोष्ठी में बीकानेर के वरिष्ठतम व वरिष्ठ कवियों सहित अनेक नवोदित रचनाकारों ने वर्तमान परिपेक्ष में मित्रता के महत्व को उजागर करते हुए अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के माध्यम से परिवार से लेकर वैश्विक स्तर पर मित्रता के महत्व को रेखांकित किया।
इस काव्य गोष्ठी में बीकानेर के वरिष्ठतम साहित्यकार, कवि व चिकित्सक डॉ. शंकरलाल स्वामी ने राम-सुग्रीव एवं कृष्ण-अर्जुन की मित्रता के धार्मिक-सांस्कृतिक पक्ष को इन शब्दों में – राम और सुग्रीव मिताई, रघुनंदन सीता सुधि पाई । विश्व ईश कहि करै आरती,अर्जुन हित वे बने सारथी – प्रस्तुत कर सभी को भक्तिमय वातावरण में डुबो दिया। इसी क्रम में वरिष्ठ कवि, साहित्यकार, गीतकार जुगल किशोर पुरोहित ने कृष्ण सुदामा की दोस्ती के उदाहरण को जोड़ते हुए अपनी रचना – दोस्ती हो कृष्ण सुदामा जैसी,दोस्ती में स्वार्थ कैसा, दोस्ती हो भाई जैसी – के रूप में प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवि मोहन लाल जांगिड़ ने भी कृष्ण सुदामा जैसी दोस्ती पर ही केंद्रित अपनी रचना – कृष्ण सुदामा सी दोस्ती, अजर अमर संसार, सुख दुःख में साथ सदा, नोक झोंक संग प्यार – जैसे सुंदर शब्दों में बांधते हुए प्रस्तुत की।
काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवि, साहित्यकार शिव शंकर शर्मा ने सखा संगम शीर्षक से अपनी शानदार रचना – कल मिले परसों मिले, अभी-अभी तो मिले थे हम, होती नहीं तसल्ली, जबतक न यार से मिल लेते हम – प्रस्तुत कर जीवन में दोस्ती का महत्व बताया।
काव्य गोष्ठी के संयोजक पूर्व प्रिंसिपल, चिंतक व लेखक प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी ने मित्रता दिवस को सांप्रदायिक एकता की भावना के रूप में मानते हुए अपनी रचना इन शब्दों में व्यक्त की – मित्रता कभी भी उम्र,धर्म,जाति ना देखती, यह इक दूजे की भावनाएं समझती – । काव्य गोष्ठी में युवा कवयित्री सरिता तिवाडी पारीक ने मित्रता दिवस को साहित्यिक रंग देते हुए अपनी दोस्ती को कलम से जोड़कर इन शब्दों में – ऐ कलम तू ही मेरी सच्ची सखा मीत प्यारी, जब जब चला अन्तर्मन में द्वंद तू चली हर कदम मेरे संग – को काव्यमय शब्दों में प्रस्तुत कर खूब प्रशंसा प्राप्त की । इसी प्रकार गोष्ठी में हिस्सा लेते हुए पीबीएम हॉस्पिटल के पूर्व नर्सिंग अधीक्षक व वरिष्ठ कवि डॉ. जगदीश दान बारहठ ने दोस्त शीर्षक से मन से मन की बात कहने को मित्रता बताते हुए अपनी रचना – कुछ तुम बोलो कुछ हम बोलें, मन पर मन की बात कहें – जैसे मन को छू लेने वाले शब्दों में प्रस्तुत कर काव्य गोष्ठी में समा बांध दिया। काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवि मोहन लाल जांगिड़ ने दो सखियां शीर्षक से हास्य रचना – दो सखियां मिली बाद चालीस साल, बीच बाजार हुई गदगद पूछे हालचाल – प्रस्तुत कर सभी को हंसी से सराबोर कर दिया।
काव्य गोष्ठी में युवा कवयित्री एवं शिक्षक डॉ. कृष्णा गहलोत ने मित्रता शीर्षक से मानवीय गुणों की व्याख्या करते हुए अपनी रचना में – दया ,करुणा, ममता समाए उसका नाम है मित्रता, समस्त धर्मों का सार है मित्रता, सृष्टि का आधार है मित्रता – जैसे शब्दों को सम्माहित कर संपूर्ण सृष्टि को मित्रता के महत्व का संदेश दिया। इनके अलावा काव्य गोष्ठी में अन्य रचनाकारों ने भी विश्व मित्रता दिवस के महत्व पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर इस दिवस की प्रासंगिता सिद्ध की। काव्य गोष्ठी के प्रारंभ में वरिष्ठ कवि, साहित्यकार, गीतकार जुगल किशोर पुरोहित ने सभी का स्वागत किया। अंत में वरिष्ठ कवि मोहन लाल जांगिड़ ने आभार माना।



