27 अप्रैल को देशभर में गौ हत्या रोकने को लेकर तहसीलों पर प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपेंगे गौ-भक्त

धर्म-कर्म

रतन बिहारी पार्क से कलेक्ट्रेट तक निकलेगा जुलूस, गौ को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा देने की उठी मांग

बीकानेर // “गौ सम्मान आह्वान अभियान” के सफल संचालन को लेकर बीकानेर जिले में संत समाज एवं तहसील-पंचायत स्तर के गौ-भक्तों की एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन गंगाशहर स्थित श्री राम सरोखा, कैलाश धाम में किया गया। इसमें जिलेभर के संतों, महंतों और गौ-सेवकों ने भाग लेकर अभियान को व्यापक स्तर पर सफल बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में शिकार से पधारे महंत श्री चन्द्रमादास जी महाराज एवं श्री राम सरपोखा धाम के महंत महामंडलेश्वर सरजू दास जी महाराज ने मुख्य रूप से संबोधित किया। इस दौरान महंत शंकर पुरी जी महाराज (नवलपुरी), महंत श्री आकाशानंद जी महाराज (गोलरी), महंत श्री अमरीश पुरी जी महाराज (लालगुफा) एवं महंत श्री देवेंद्र नाथ जी महाराज सहित कई संत मौजूद रहे। कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि गायों को अनुदान नहीं, बल्कि सम्मान की आवश्यकता है और गौ-रक्षा समाज का नैतिक दायित्व है।

घटते गोवंश पर सीकर से आये चन्द्रमादास महाराज ने जताई चिंता

महंत श्री चन्द्रमादास जी महाराज ने कहा कि आजादी के समय भारत में लगभग 80 करोड़ गायें थीं, लेकिन वर्तमान में उनकी संख्या तेजी से घटकर बहुत कम रह गई है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि गौ-वंश की रक्षा नहीं की गई तो यह समाज और संस्कृति दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि गौ-रक्षा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है, जिसके लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा।

गाय को मिले राष्ट्र माता का दर्जा- सरजू दास महाराज

महामंडलेश्वर सरजू दास जी महाराज ने बताया कि 27 अप्रैल को सुबह 10 बजे बीकानेर जिले की सभी तहसीलों में लोग अपने-अपने गांवों से एकत्रित होकर नारेबाजी करते हुए तहसीलदारों को ज्ञापन सौंपेंगे।
उन्होंने कहा कि इस ज्ञापन में मुख्य रूप से गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और गाय को ‘राष्ट्रीय माता’ का दर्जा देने की मांग रखी जाएगी।
उन्होंने आगे बताया कि बीकानेर

शहर एवं आसपास के क्षेत्रों के लोग 27 अप्रैल को सुबह 10 बजे रतन बिहारी पार्क में एकत्रित होंगे, जहां से जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट तक पहुंचकर ज्ञापन सौंपा जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन रविंद्र हर्ष एवं ज्योति प्रकाश रंगा ने किया।