हर्षों के चौक में गणगौर गीतों का हुआ समापन, 6 दशक पुरानी है यह परंपरा

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बीकानेर // स्थानीय हर्षों के चौक में मंगलवार को गणगौर गीतों का समापन हुआ। यहां पिछले 6 दशक से चली आ रही परंपरा के तहत चौक के पाटे पर मोहल्ले के सभी घरों से महिलाएं अपनी अपनी गणगौर को लाकर सजाती हैं और फिर पुरुष वहां पर गीतों और वचनों की प्रस्तुति देते हैं। पीरदान हर्ष द्वारा शुरू किए गए इस अद्भुत आयोजन को उनकी तीसरी पीढ़ी आगे बढ़ा रही है। बड़ी संख्या में मोहल्ले वह आसपास के क्षेत्र के पुरुष शामिल होते हैं और पारंपरिक गणगौर गीतों की प्रस्तुति देते हैं। होली के दूसरे दिन से ही यहां पर गणगौर के गीत गूंज रहे थे। मंगलवार को इसका विधिवत समापन हुआ। अपने तरह के इस अनूठे आयोजन में पूरे मोहल्ले में विशेष रूप से रोशनी की जाती है गणगौर सजाई जाती है। विशेष पूजन के बाद महा आरती और प्रसाद का वितरण किया जाता है। मंगलवार को इन गणगौर गीतों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग आये।

संयोजक अबीरचंद हर्ष ने बताया कि गणगौर गीतों के कार्यक्रम में बलदेव दास, कुशाल चंद हर्ष, अनंत कुमार, गिरिराज कुमार, बृज रतन हर्ष, प्रेम कुमार,युगल नारायण ,नंद किशोर, अशोक कुमार, कैलाश कुमार,महेश कुमार,नितिन हर्ष, आनंद कुमार हर्ष,
शिव लाल हर्ष मधा महाराज ओर मोड़ा महाराज सहित युवाओं ने गीतों की प्रस्तुति दी। देर रात तक चोक में दर्शनार्थी आते रहे।