


नागौर // कलक्ट्रेट सभागार स्थित डीओआइटी केंद्र में शनिवार को देवी अहिल्या बाई होलकर की 300 वीं जयंती पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें जिला कलक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने देवी अहिल्या बाई के चित्र पर दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान जिला कलक्टर ने देवी अहिल्याबाई के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कहते हुए उनके संघर्षों एवं योगदान पर चर्चा की। एडीएम चंपालाल जीनगर ने बताया कि अहिल्या बाई मराठा साम्राज्य की प्रसिद्ध शासक थीं। एक किसान की बेटी होने के बावजूद उन्होंने सफल शासक और सैन्य नेता के रूप में ख्याति अर्जित की।
कार्यक्रम में विशेष योगदान देते हुए अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी मदनलाल शर्मा और प्रधानाचार्य मनोज व्यास द्वारा देवी अहिल्या के जीवन के संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में वक्तव्य दिया गया।
अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी राधेश्याम गोदारा ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए बताया कि अहिल्या बाई का जन्म 31 मई 1725 को चौड़ी हैदराबाद में हुआ। बाद में इस स्थान का नाम अहिल्या नगर रखा गया। उनका निधन 13 अगस्त 1795 को इंदौर में हुआ। उनके शासनकाल में अनेक मंदिरों, घाटों, कुओं और बावड़ियों का निर्माण हुआ।
कार्यक्रम में उपखंड अधिकारी गोविंद सिंह भींचर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जुगल किशोर सैनी सहित जिला स्तरीय अधिकारी, स्कूल व कॉलेज प्रोफेसर तथा एनसीसी व स्काउट गाइड के विद्यार्थी उपस्थित रहै।




