



‘सृजन सम्मान’ से हुए विभूषित, लेखक से मिलिए की 138वीं कड़ी में की शिरकत
श्रीगंगानगर // युवा गीतकार डॉ. हरिशंकर आचार्य ने कहा है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। इसके लिए मेहनत करनी ही पड़ती है। साहित्य भी इससे अलग नहीं है। डॉ. आचार्य रविवार को सृजन सेवा संस्थान के मासिक कार्यक्रम ‘लेखक से मिलिए’ की 138वीं कड़ी में जैन पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में बतौर लेखक संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि बीकानेर की आबोहवा ही ऐसी है कि वहां रहते हुए साहित्य की तरफ झुकाव होने लगा था। वहीं से सीखा। वही वातावरण गुरु है। आचार्यों के चौक पर होने वाली रम्मत पर कुछ पहली बार कुछ लिखा था। फिर आगे सीखते हुए अब तक का सफर तय किया है। आज भी एक विद्यार्थी हूं और सीख ही रहा हूं। डॉ. आचार्य ने अपनी कविताओं और गीतों से गीतों से समां बांध दिया। उन्होंने जन्मभूमि से शुरू किया और जननी से होकर राष्ट्र प्रेम और बेटी के भावनात्मक रिश्ते तक गीत सुनाकर भाव विभोर कर दिया। उन्होंने ‘वंदेमातरम’ पर एक गीत सुनाया, तो हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। साथ ही श्रोताओं ने सुर से सुर मिलाते हुए माहौल को देशभक्ति से सराबोर कर दिया।
बचपन की खुशियों और आज की जिंदगी का जिक्र करते हुए डॉ. आचार्य ने अपने मार्मिक गीत के माध्यम से बहुत गहरी बात कही, ‘सुकूं देते थे हां कितना/वो मुट्ठी में भरे सिक्के/ बहुत अब नोट हैं लेकिन/ नहीं खुशियों के वो सिक्के।’ उपस्थित लोगों में से द्वारका प्रसाद नागपाल, राकेश मितवा, ऋतु सिंह, उर्मिला चितलांगिया इत्यादि ने उनसे कुछ सवाल भी पूछे, जिनका उन्होंने बहुत सहजता से जवाब दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष जोगेंद्र कौशिक ने कहा कि आज बच्चों को मोबाइल के बजाय साहित्य से जोड़ने की आवश्यकता है, क्योंकि मोबाइल पथभ्रष्ट कर रहा है, जबकि साहित्य मार्ग दिखाता है। विशिष्ट अतिथि बाल कल्याण समिति के सदस्य डॉ. रामप्रकाश शर्मा ने कहा कि डॉ. आचार्य ने जिस खूबसूरती से रचनापाठ किया है, वह उन्हें विशिष्ट बनाता है।
जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी अनिल शाक्य भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इससे पहलू सृजन के सचिव कृष्णकुमार आशु ने डॉ. आचार्य का परिचय दिया। आभार अध्यक्ष डॉ. अरुण शहैरिया ताइर ने व्यक्त किया। संचालन अरुण उर्मेश ने किया।
डॉ. आचार्य को सृजन साहित्य सम्मान
कार्यक्रम में डॉ. हरिशंकर आचार्य को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए सृजन साहित्य सम्मान अर्पित किया गया। वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र सारस्वत, कौशिक, शर्मा, शहैरिया व आशु ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर, सम्मान प्रतीक और पुस्तक भेंट करके सम्मानित किया। बाल कल्याण समिति बीकानेर के अध्यक्ष जुगलकिशोर व्यास को भी सम्मानित किया गया।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में डॉ. ओपी वैश, पत्रकार राजकुमार जैन, बनवारीलाल शर्मा, अशोककुमार शर्मा, डॉ. आशाराम भार्गव, सुरेंद्र सुंदरम, ललित चराया, सुषमा गुप्ता, ओमाराम बैगड़, ऋतुसिंह, ममता पुरी, मोहन दादरवाल, ममता आहुजा, अनिल धूड़िया, महेश गहलोत, रामचंद्र सैनी, जयनारायण पुरोहित सहित अनेक साहित्यकार एवं साहित्य प्रेमी मौजूद थे।



