10 साल पुराने चेक बाउंस मामले में नया मोड़, न्यायालय ने विवादित चेक को एफएसएल जांच के लिए भेजने के दिए आदेश

प्रशासन

बीकानेर, 6 जून। लगभग दस वर्ष पुराने चेक अनादरण (चेक बाउंस) प्रकरण में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (एन.आई. एक्ट प्रकरण) संख्या-02, बीकानेर की पीठासीन अधिकारी श्रीमती भारती पाराशर ने विवादित चेक की वैज्ञानिक जांच कराने के आदेश जारी किए।

प्रकरण में अभियुक्त प्रेम कुमार सेठिया पुत्र स्वर्गीय भवरलाल सेठिया, निवासी सेठिया मोहल्ला, भीनासर (बीकानेर) की ओर से अधिवक्ता गोपाल लाल हर्ष एवं अधिवक्ता निमिषा शर्मा के माध्यम से एक प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया गया था। आवेदन में विवादित चेक को हस्तलेखन एवं हस्ताक्षर विशेषज्ञ द्वारा जांच के लिए भेजने का अनुरोध किया गया था, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।

मामला संजय कुमार चौधरी बनाम प्रेम कुमार सेठिया शीर्षक से विचाराधीन है। अभियुक्त पक्ष की ओर से प्रस्तुत तर्कों में कहा गया कि विवादित चेक पर अंकित राशि, दिनांक तथा अन्य लिखावट की सत्यता विवादित है। ऐसे में मामले के निष्पक्ष एवं न्यायोचित निस्तारण के लिए वैज्ञानिक जांच आवश्यक है।

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता गोपाल लाल हर्ष ने न्यायालय का ध्यान अभियुक्त पक्ष द्वारा बयान के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों की ओर आकर्षित किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने माना कि मामले के प्रभावी और निष्पक्ष निस्तारण के लिए विशेषज्ञ जांच आवश्यक है।

न्यायालय के आदेशानुसार विवादित चेक एवं आवश्यक दस्तावेज परीक्षण के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजे जाएंगे। साथ ही अभियुक्त को अपने पूर्व स्वीकृत हस्ताक्षरों वाले दस्तावेज भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि तुलनात्मक परीक्षण किया जा सके।

कानूनी जानकारों के अनुसार यह आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि विशेषज्ञ रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवादित चेक पर हस्ताक्षरों के अतिरिक्त अन्य प्रविष्टियां वास्तव में किस व्यक्ति द्वारा की गई हैं। माना जा रहा है कि एफएसएल रिपोर्ट इस मामले के अंतिम निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

अभियुक्त पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता गोपाल लाल हर्ष एवं अधिवक्ता निमिषा शर्मा ने न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि वैज्ञानिक जांच से मामले की वास्तविकता सामने आएगी तथा न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक मजबूती मिलेगी।

संलग्न: न्यायालय के आदेश की फोटोप्रति।