शरद पूर्णिमा पर सजेगी सुर, साहित्य और कला की महफिल, 25 अक्टूबर को होगा ‘शरद संगत’ का आयोजन

साहित्य

धर्म सज्जन ट्रस्ट, गंगाशहर के खुले मंच पर पूर्णिमा के चांद की रोशनी में कवि, गायक और कलाकार देंगे प्रस्तुतियां

बीकानेर। दक्ष सिक्योर सर्विसेज और अरज फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी शरद पूर्णिमा के अवसर पर रविवार, 25 अक्टूबर को ‘शरद संगत’ कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। धर्म सज्जन ट्रस्ट, गंगाशहर के खुले मंच पर रात साढ़े सात बजे से पूर्णिमा के चांद की साक्षी में सुर, साहित्य और कला की त्रिवेणी सजेगी। कार्यक्रम में बीकानेर के कवि, साहित्यकार, गायक और कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे।

दक्ष सिक्योर सर्विसेज के शशांक शेखर जोशी ने बताया कि शरद पूर्णिमा को चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसने की मान्यता है। इस पावन अवसर पर संगीत, साहित्य और कला से जुड़े लोगों की संगत सृजनात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है। ‘शरद संगत’ इसी भाव को साकार करने वाला आयोजन है, जहां कला और साहित्य के माध्यम से लोगों को एक साझा सांस्कृतिक मंच मिलता है।

अरज फाउंडेशन के डायरेक्टर रविंद्र हर्ष ने बताया कि यह आयोजन बीकानेर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की एक सार्थक पहल है। हर वर्ष शहर के साहित्यकार, कवि, गायक और कलाकार इसमें भागीदारी निभाते हैं और अपनी प्रतिभा से आयोजन को यादगार बनाते हैं। इस बार भी शहर के अनेक प्रबुद्धजन कार्यक्रम में शामिल होंगे।

कविता, गजल और शास्त्रीय गायन से सजेगी शाम

अरज के निदेशक ज्योति प्रकाश रंगा ने बताया कि कार्यक्रम में शास्त्रीय गायक गौरी शंकर सोनी, राज नारायणपुर, गजल गायक नियाज तथा कवि हरीश बी. शर्मा, संजय आचार्य, वरुण विप्लव, विकास आनंद, मस्ताना, गोपाल पुरोहित, राजेंद्र जोशी, राजा स्वर्णकार, मोनिका गौड़, मनीषा स्वर्णकार और डॉ. कृष्णा आचार्य सहित अनेक कवि एवं कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। कविता, गजल और संगीत के विविध रंगों से सजी यह सांस्कृतिक संध्या श्रोताओं को साहित्यिक और कलात्मक आनंद प्रदान करेगी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में सीके बिरला के सेल्स हेड संजीव जाजोरिया और असिस्टेंट मैनेजर मार्केटिंग जितेश नागपाल अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।

चांदनी रात में कला और संस्कृति का संगम

‘शरद संगत’ का उद्देश्य बीकानेर की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत बनाए रखना और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाना है। पूर्णिमा की चांदनी, कविता के भाव, गजलों की मिठास और संगीत की स्वर लहरियों के बीच होने वाला यह आयोजन शहर की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा देगा।