पाठकों को पसंद आएगी जीवन से सरोकार रखती लघुकथाएं

साहित्य

राजस्थानी के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. नमामीशंकर आचार्य के लघुकथा संग्रह ‘उतर- पातर’ का हुआ लोकार्पण

बीकानेर // राजस्थानी के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. नमामीशंकर आचार्य के राजस्थानी लघुकथा संग्रह ‘उतर पातर’ का लोकार्पण रविवार को महाराजा नरेन्द्र सिंह ऑडिटोरियम में पारायण फाउंडेशन की ओर से आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष राजस्थानी अकादमी, बीकानेर के पूर्व सचिव डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य ने कहा कि लोकार्पित लघुकथा संग्रह ‘उतर- पातर’ में राजस्थानी के पुराने और मूल शब्दों का उपयोग कर भाषा के मूल स्वरूप संरक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि जीवन के विभिन्न पक्षों से सरोकार रखती ये लघुकथाएं पाठकों को पसंद आएंगी।

साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली में राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के पूर्व संयोजक और वरिष्ठ साहित्यकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा कि ‘उतर- पातर’ संग्रह में लेखक ने युगानुकूल प्रयोग कर राजस्थानी लघुकथा लेखन को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. नमामी ने विलुप्त हो रहे शब्दों को पुन: भाषा में स्थापित करने का सराहनीय कार्य किया है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आचार्य मनोज दीक्षित ने कहा कि राजस्थानी करोड़ों लोगों की भाषा है, इसे इसका सम्मान और अधिकार मिलना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि हम महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में राजस्थानी विभाग खोलने के लिए दृढ़ संकल्पित होकर प्रयास कर रहे हैं। लोकार्पित कृति पर पत्र वाचन करते हुए कवि, नाटककार, कथाकार एवं पत्रकार हरीश बी. शर्मा ने कहा कि संग्रह की लघुकथाएं सृजन की प्रत्येक कसौटी पर खरी उतरती हैं। इनमें जीवन के अनुभवों के साथ ही समाज तथा समय की विकृतियों- विसंगतियों पर निर्भीकता से प्रहार किए गए हैं।

स्वागत उद्बोधन देते हुए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक तथा कवि डॉ. हरिशंकर आचार्य ने कहा कि डॉ. नमामी के अनुभवों और अनुभूतियों ने समाज की वास्तविकता से रूबरू कराने वाली लघुकथाओं का आकार लिया है जिसका हमें खुले हृदय से स्वागत करना चाहिए। कार्यक्रम संयोजक कवि- पत्रकार संजय आचार्य वरुण ने कहा कि समाज और युग में जो घटित होता है, रचनाकार अपनी रचनाशीलता में उसे प्रकट करता है। उन्होंने कहा कि यह संग्रह राजस्थानी में स्तरीय गद्य लेखन के अभाव को पूरा करता है।

लोकार्पित कृति के रचनाकार डॉ. नमामीशंकर आचार्य ने कहा कि मनुष्य होने के नाते जो अनुभव और समय और समाज से मिले हैं, इन लघुकथाओं के रूप में उन्हें ही कहने का प्रयास किया है। ये लघुकथाएं जीवन की कुछ वास्तविकताओं से पर्दे हटाकर देखने और दिखाने की कोशिश भर है। उन्होंने कहा कि संवेदनाएं हर मनुष्य के भीतर होती है, लेकिन लेखक में वे रचनाबोध बनकर उभर आती हैं। बेसिक पी जी महाविद्यालय के निदेशक रामजी व्यास ने कहा कि डॉ. नमामी राजस्थानी भाषा के निष्ठावान सिपाही हैं, उन्हीं के आग्रह पर महाविद्यालय में राजस्थानी विभाग स्थापित किया गया। वे सतत रचनाकर्म से बीकानेर और राजस्थान को गौरवान्वित करेंगे। लेखक का परिचय साहित्यकार सुरेश सोनी ने चंपू शैली में कराया।

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा, राजेन्द्र जोशी, राजाराम स्वर्णकार, शंकरसिंह राजपुरोहित, शिक्षाविद विजयशंकर आचार्य, डॉ. सुधा आचार्य, याकूब भाटी, कौसर भुट्टो, शायर इरशाद अज़ीज़, क़ासिम बीकानेरी, वली मोहम्मद ग़ौरी, जाकिर अदीब, प्रमोद कुमार शर्मा, आकाशवाणी के अमित सिंह, महेश उपाध्याय, मनीष कुमार जोशी, चित्रकार योगेन्द्र पुरोहित, सिद्धार्थ जोशी, डॉ. नासिर ज़ैदी, अब्दुल शकूर सिसोदिया, मनीषा आर्य सोनी, आत्माराम भाटी, डॉ. गौरीशंकर प्रजापत, हरिकिशन व्यास, विनीता शर्मा, चंद्रशेखर शर्मा, सुधा सारस्वत, भावना आचार्य, भास्कर आचार्य, डॉ. चन्द्रशेखर श्रीमाली, डॉ. मुकेश हर्ष, विप्लव व्यास, एडवोकेट इसरार हसन कादरी, डॉ. अजय जोशी, राजेन्द्र स्वर्णकार, डॉ. फारूक़ चौहान, शिवराज भारतीय, गिरीश पुरोहित, पेंटर पी. राज, अजीत राज, छोटू खां, नगेन्द्र किराडू, बी डी हर्ष, श्याम सुंदर किराड़ू, कृपा शर्मा, हितेश पुरोहित, भूरमल सोनी, अमित गोस्वामी, दीवान दान रतनू, मधुसूदन सोनी, मोट्यार परिषद के हिमांशु टाक, प्रशांत जैन, राजेश चौधरी, राजेश कड़वासरा, कमल मारू, ब्रमदत्त, सुनील विश्नोई और मोहित के. विश्नोई उपस्थित रहे। आगंतुकों के प्रति आभार रामअवतार उपाध्याय ने प्रकट किया।