दक्षिण भारतीय शैली में बनेगा बालवा में भव्य बालाजी मंदिर का निर्माण

धर्म-कर्म

एक माह में मंदिर के आसपास होगा सघन पौधरोपण, आज हुई शुरुआत

नागौर // शहर के नये रीको इण्स्ट्रीयल एरिया व बीकानेर-जोधपुर रिंग रोड़ के आरम्भिक चौराहे के पास स्थित प्राचीन बालाजी मंदिर स्थित है, जहां शिव परिवार की भी मूर्तियों स्थापित है। उक्त मंदिर के साथ प्याऊ, बरामदों का निर्माण भी करवाया हुआ है जो कि राहगीरों की प्यास बुझाने व विश्राम हेतु भी काम में आता है। उपरोक्त बालाजी मंदिर को अब भव्य रूप देने की योजना बनाई जा रही है।

बालवा बालाजी मंदिर विकास समिति के सचिव डॉ. पवन श्रीमाली एडवोकेट ने बताया कि ग्राम पंचायत गोगेलाव, बालवा व आसपास के गांव तथा रीको में व्यवसाय करने वाले उद्योगपतियों तथा शहर के अन्य भामाषाहों की मदद से बालवा में हनुमान जी, बालाजी मंदिर को भव्य स्वरूप में बदला जायेगा। श्रीमाली ने बताया कि इस बालाजी के मंदिर को भारतीय दक्षिण मंदिरों के शैली के रूप में विकसित किया जाएगा। आज ग्राम गोगेलाव के निवासी रवि बोथरा के द्वारा अपने जन्म दिवस पर वृक्षारोपण की शुरूआत की गई।

इस दौरान समिति के अध्यक्ष दिलीप भोजक, सभापति श्रीमति मीतू बोथरा, पार्षद नवरत्नमल बोथरा, पार्षद प्रतिनिधि नेमीचंद वैष्णव, अविनाष बींजावत तथा गोगेलाव सरपंच प्रतिनिधि गिरधारी सिंह, बालवा पूर्व सरपंच भंवर सिंह, पूजारी हरिराम के मध्य समिति के उपाध्यक्ष व समाजसेवी, उद्योगपति हरिराम धारणियां मौजूद ठगे उन्होंने घोषणा कर जानकारी दी कि बालवा बालाजी मंदिर विकास समिति द्वारा आस पास की ग्राम पंचायतों व ग्रामवासियों तथा सामाजिक संगठनों पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रेरणा के रूप में बालाजी मंदिर की खाली भूमि पर सघन वृक्षारोपण इसी माह किया जायेगा जिस हेतु मंदिर की भूमि को साफ करवाया जाकर सैकड़ों वृक्ष जिसमें नीम, पीपल, बरगद व अन्य औषधीय व फलों के वृ़क्ष लगाकर हनुमान वाटिका का निर्माण करवाया जायेगा तथा वृक्षारोपण के बाद समिति द्वारा देखभाल व बूंद-बूंद सिंचाई प्रणाली अपनाकर पौधों को विकसित किया जायेगा।

अध्यक्ष दिलीप भोजक ने बताया कि वर्तमान मंदिर को बढाया जाकर यात्रियों व आस पास के ग्रामीणों के लिये बरामदे, कमरों व प्याऊ के निर्माण के साथ लाईब्रेरी का निर्माण भी करवाया जायेगा। जहां धार्मिक पुस्तकें रखी जायेगी। समिति के सचिव डॉ. श्रीमाली ने बताया कि बालवा बालाजी मंदिर का दक्षिण भारतीय मंदिरों की तर्ज पर भव्य स्वरूप में पुनर्निर्माण करवाया जायेगा जो आस पास के औद्योगिक क्षेत्र व ग्रामवासीयों तथा यात्रियों के लिये एक दर्षनीय स्थल होगा जहां पर विश्राम, पेयजल, हरितिमा के साथ साथ धार्मिक पुस्तकों के अध्ययन की सुविधा भी प्राप्त होगी।