दिव्य व भव्य शाखा संगम में 65 शाखाओं का एक स्थान पर संगम

राजनीति

क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम का मिला मार्गदर्शन

नागौर // एक स्थान परंतु 65 संघ शाखा, 65 मुख्य शिक्षक, 65 कार्यवाह, 65 गण शिक्षक, 65 प्रवासी मूल्यांकन कर्ता कार्यकर्ता। समान मूल्यांकन पद्धति। ऐसा दिव्य व भव्य स्वरूप रविवार को दिखाई दिया शारदा बाल निकेतन के खेल परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शाखा संगम में । यह दृश्य जीवंत हो उठा। नागौर जिला मुख्यालय के चार मंडल शारदापुरम् , बंशीवाला, प्रताप व आवासन मंडल की 40 शाखा व नागौर ग्रामीण खंड की 25 शाखाओं के स्वयंसेवक एक साथ इस शाखा संगम में एकत्र हुए। लेकिन इन सभी स्वयंसेवकों को खेल परिसर में 65 रेखांकन युक्त मैदान में अपने-अपने संघ स्थान की कार्य पद्धति का प्रस्तुतीकरण किया गया जिसका गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन किया हुआ।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र प्रचारक निंबाराम का बौद्धिक पाथेय प्राप्त हुआ। सवेरे ठीक पोने आठ बजे सभी स्वयंसेवकों ने इस शाखा संगम के निमित्त संपत किया जिसका समापन क्षेत्रीय प्रचारक के बौद्धिक के बाद ध्वजावतरण हुआ। सभी स्वयंसेवकों ने खेल, आसन, समता आदि संघ स्थान की कार्य पद्धति का अपनी अपनी शाखा के अनुसार प्रत्यक्षीकरण किया।

शाखा से सीखे गए सेवा भाव हमारे मन, कर्म व वचन में ही हो: निंबाराम

क्षेत्रीय प्रचारक ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। आज इस विचार को बहुत बड़ा वर्ग मान रहा है। सामाजिक कार्यों में संघ के साथ सहभागी बनने की भी इच्छा संगठनों द्वारा की जाती है। जितना संघ का बड़ा कार्य और विचार हुआ है उसके अनुसार हिंदू समाज बड़ा हुआ है या नहीं यह संघ के स्वयंसेवकों को विचार करना चाहिए। संघ सबका बने, नहीं बना तो इसका अर्थ है हम समाज के सभी वर्गों तक पहुंच नहीं पाए हैं। हम जैसा संघ जो कहता है वह करें या जैसा संघ द्वारा बोला जाता है वैसा कार्य करें वैसा ही बने। संघ से निरपेक्ष भाव रखने वाले भी इसे स्वीकारते हैं। संघ के संबंध में यह धारणा है कि संघ के स्वयंसेवक अनुशासित हैं हिंदुत्वनिष्ठ हैं और अनुशासन की पालना करते हैं। उनके इस दृष्टिकोण के अनुसार हमें अपना स्वयं का आकलन करना चाहिए। शाखा से जो सेवा कार्य हमने सीखे हैं और उस सेवा की संवेदना हमारे मन, वचन और कर्म से प्राप्त हो इस दृष्टि से आत्मावलोकन करना चाहिए। बाहर की दुनिया के अनुसार अपना आकलन न करें। संघ कार्य और विचार के अनुसार आकलन करें। उन्होंने कहा कि शाखा व्यक्ति निर्माण का केंद्र है। इस 100 वर्ष के कालखंड में संघ के संस्थापक डॉक्टर केशव हेडगेवार की कल्पना के अनुसार संघ, स्वयंसेवक व समाज का निर्माण हो इस दृष्टि से कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मातृभूमि की रज कण नित्य प्रति हमारे तन पर लेपित हो तभी शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक विकास हो सकेगा। उन्होंने परिवार में भी पर्यावरण संरक्षण, नागरिक शिष्टाचार, मंगल संवाद, सामाजिक समरसता व स्वदेशी के भाव व्यावहारिक रूप से अपनाने का आग्रह किया।

शाखा संगम में विभाग संचालक हनुमान सिंह देवड़ा ने हरित संगम 2025 की जानकारी दी। जिला संघ चालक मुकेश भाटी द्वारा जिला कार्यकारिणी के दायित्वों की घोषणा की गई।