



राजकीय विधि महाविद्यालय में हुआ मूट कोर्ट का मंचन
बीकानेर // राजकीय विधि महाविद्यालय में आज सहायक आचार्य डॉ. रितु चौधरी के निर्देशन में महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा अलबर्ट बनाम रूबिया मामले पर मूट कोर्ट का मंचन किय गया। जिसमें न्यायालय की प्रक्रिया को विद्यार्थियों द्वारा बहुत ही सरल तरीके से समझाने का प्रयास किया गया। इस मूट कोर्ट में उच्च न्यायालय को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका की गई। इसमें याचिकाकर्ता, अल्बर्ट हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13i(A) तलाक़ याचिका लंबित रहने के दौरान भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाने और मामले को यू.के. स्थानांतरित किये जाने की माँग की गई, क्योंकि घटना यू.के. घटित में हुई हैं।

इस मामले में न्यायालय द्वारा पिटीशनर की याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा कि IPC की धारा 498A के तहत आपराधिक कार्यवाही मुंबई में जारी रहेगी व तलाक़ की याचिका के तथ्यों को भी इस्तेमाल किया जा सकता है और कार्यवाही को यू.के .में स्थानांतरित किए जाने का कोई आधार नहीं है।
इन्होंने निभाई भूमिका
मूट कोर्ट में जज के रूप में ख्याति तंवर , पिटीशनर की ओर से एडवोकेट ऋषि शर्मा व मेघा व्यास प्रतिवादी की ओर से एडवोकेट रमजान नवाज़ व हेमंत सुथार पैरवी की। स्टेनो के रूप में मनीषा व पेशकार के रूप प्रियंका ने भूमिका निभाई। पिटीशनर के रूप में (अलबर्ट ) की भूमिका गौरव व प्रतिवादी के रूप में (रूबिया ) पूजा नायक ने भूमिका निभाई।
मूट कोर्ट से मिलता है व्यवहारिक ज्ञान- बिश्नोई
इस अवसर पर विधि महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो भगवानाराम बिश्नोई ने मूट कोर्ट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मूट कोर्ट के आयोजन से छात्रों को न्यायालय में होने वाली प्रक्रिया का व्यवहारिक ज्ञान होता है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ कुमुद जैन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार मूट कोर्ट के आयोजन से छात्रों में शैक्षणिक व व्यावहारिक कौशल का विकास होता है। वर्तमान में उपलब्ध तकनीक का उपयोग करते हुए अपने ज्ञान का वर्धन करना चाहिए। कार्यक्रम में वरिष्ठ सदस्य के रूप में महाविद्यालय के पुस्तकालय अध्यक्ष बीरबल मेघवाल विद्यार्थियों को अपना लक्ष्य निर्धारित करते हुए उसी अनुरूप मेहनत करनी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ रेखा आचार्य व डॉ शिव शंकर व्यास ने किया ने किया। महाविद्यालय की सहायक आचार्य डॉ मल्लिका परवीन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।



