सीमांत क्षेत्र के खेतों में जल का अपव्यय रोकने के लिए बन रहे जल संग्रहण स्ट्रक्चर बने किसानों के लिए वरदान

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वंदे गंगा, जल संरक्षण जन अभियान’ के तहत मीडिया फील्ड विजिट’ आयोजित

प्रमोद आचार्य

बीकानेर // सीमावर्ती बीकानेर जिले में सिंचाई के पानी का अपव्यय रोकने के लिए बने जल संग्रह के स्ट्रेक्चर किसानों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। अब खेतों में अंतिम छोर तक सिंचाई पानी नही पहुँचने की शिकायत हमेशा के लिए खत्म हो चुकी है। कारण कि, सरकार ने लिफ्ट परियोजना का पानी अब खालो में डालने के बजाय खालो को हटा दिया है और वहां बड़े पाइप के जरिये पानी दिया जा रहा है। किसान अपने अपने हिस्से के मुरब्बो में इन पाइपों में फव्वारा लगाकर सिंचाई कर रहे हैं। ऐसे में सिंचाई के लिए नहरी पानी की न तो छीजत हो रही है न ही पानी चोरी हो रहा है। भजनलाल सरकार की यह सिंचाई पद्धति वरदान साबित हो रही है।

मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के निर्देश पर आयोजित हो रहे ‘वंदे गंगा, जल संरक्षण जन अभियान’ के दूसरे दिन शुक्रवार को ‘मीडिया फील्ड विजिट’ के दौरान बीकानेटलर के पत्रकारों ने जिले के सीमांत क्षेत्रों में राज्य सरकार द्वारा करवाए गए जल संरक्षण कार्यों का अवलोकन किया। इस दौरान लाभार्थियों ने राज्य सरकार के प्रयासों से मिली राहत के बारे में बताया।

270 करोड़ से 62 हेक्टेयर जमीन पर फव्वारों से हो रही है फसलों की सिंचाई

इंदिरा गांधी नहर परियोजना की शोभासर माइनर के चक 13 एसएसएम की विजिट के दौरान परियोजना के अधिशासी अभियंता विनोद पूनिया ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा 270 करोड़ रुपए की लागत से पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट नहर परियोजना के 62 हजार हेक्टेयर कमांड क्षेत्र में फव्वारा पद्धति सिंचाई सुविधा विकसित की है। इस प्रोजेक्ट के तहत बज्जू क्षेत्र में 304 डिग्गियों का निर्माण करवाया गया है। इन डिग्गियों से मोटर पंप्स द्वारा पानी भूमिगत एचडीपीई पाइपलाइन के माध्यम से प्रत्येक मुरबे तक पहुंचाया जाएगा। इससे जल संरक्षण एवं जल उपयोगिता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण परिणाम आएंगे। इससे जल की उपयोगिता बढ़ेगी एवं बचत होगी। कम पानी में ज्यादा खेती का लाभ किसानों को मिलेगा।

करणीसिंह लिफ्ट कैनाल पर 1 लाख हेक्टेयर में लग रहे हैं फव्वारे

पूनिया ने बताया कि जिले की डॉ. करणी सिंह लिफ्ट कैनाल के एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फव्वारा पद्धति सिंचाई सुविधा विकसित करने का कार्य प्रगति पर है। इसमें लगभग 50 प्रतिशत क्षेत्र विकसित किया जा चुका है। शेष 44 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र के कार्य प्रारंभ हो गए हैं। अगले दो वर्षों में यह कार्य कर दिए जाएंगे। इससे बज्जू एवं कोलायत क्षेत्र के लगभग बीस हजार किसान परिवार लाभान्वित होंगे। श्री पूनिया ने बताया कि वीर तेजा लिफ्ट नहर का भी लगभग 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा फव्वारा पद्धति से विकसित करने का कार्य प्रगति पर है।

फॉर्म पौंड से जल संग्रहण की बढ़ी क्षमता, रामूराम को मिली राहत

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत बज्जू के श्री रामूराम के खेत में 2.5 लाख लीटर वर्षा जल संग्रहण का फार्म पौंड (खेत तलाई) बनाया गया है। पंचायत समिति बज्जू के अधिशासी अभियंता (जलग्रहण) ने बताया कि परियोजना के तहत अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को लागत का 5 प्रतिशत एवं सामान्य जाति से 10 प्रतिशत अंशदान, जलग्रहण विकास कोष हिस्सा राशि जमा करवाकर कार्य प्रारंभ करवाए जाते हैं। इसके तहत लाभार्थी श्री रामूराम द्वारा 30 हजार जमा करवाने के बाद वित्तीय वर्ष 2024-25 में 3 लाख रुपए का पौंड का निर्माण रामूराम के खेत में करवाया गया है। उत्पादकता बढ़ाने एवं एक से अधिक फसल का लाभ लेने के मामले में यह पहल लाभदायक साबित होगी। रामूराम ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार जताया और कहा कि अब वह पर्याप्त बरसाती जल संग्रहण कर सकेगा। पांडे ने बताया कि एमजेएसए 2.0 में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन मद के तहत बज्जू तेजपुरा ग्राम पंचायत के पास सार्वजनिक जलकुंड निर्माण का निर्माण करवाया गया है। यह जलकुंड 50 हजार लीटर वर्षा जल का संग्रहण कर सकता है। इसका निर्माण बज्जू तेजपुरा ग्राम पंचायत एवं वीर तेजाजी मंदिर के पास करवाया गया है। प्रवेश बिंदु गतिविधि के कार्य तहत यहीं 500 लीटर क्षमता की शीतल जल प्याऊ बनवाई गई है। जहां 24 घंटे शीतल पेयजल उपलब्ध रहता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पहली बार हो रहे हैं ये ऐतिहासिक कार्य

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत बज्जू खालसा पंचायत समिति में प्रवेश बिंदु कार्यक्रम मद में प्याऊ निर्माण, पार्क एवं ओपन जिम की स्थापना, बाल वाटिका निर्माण, स्कूलों में टांका एवं प्रार्थना स्थल मय ओपन जिम आदि के 10 कार्य करवाए गए हैं। प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन मद में वित्तीय वर्ष 2024-25 तक 104 फार्म पौंड एवं 121 जलकुण्ड बनवाए गए हैं। जिनका प्रत्यक्ष लाभ ग्रामीणों को मिले रहा है। उत्पादन मद गतिविधियों में चारागाह विकास एवं वानिकी पौधारोपण कार्य 5 हेक्टेयर में, फसल प्रदर्शन अंतर्गत उन्नत किस्मों के बीज यथा मूंग, मोठ, चना, सरसों, गेहूं इत्यादि 318 लाभार्थियों को वितरित किये गए हैं। इसके अलावा 54 कैटल शेड बनवाए गए हैं। आजीविका गतिविधियां मद के तहत कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वयं सहायता समूह को आत्मनिर्भर करने के लिए राजीविक को 75 लाख रुपये परियोजना मद से दिए गए हैं।

ये रहे मौजूद

इस दौरान उपनिदेशक (जनसंपर्क) डॉ. हरि शंकर आचार्य, जनसम्पर्क अधिकारी सुरेश बिश्नोई और जिला परिषद के आईईसी कॉर्डिनेटर गोपाल जोशी सहित वरिष्ठ पत्रकार भवानी जोशी, ब्रजमोहन आचार्य, नीरज जोशी, प्रमोद आचार्य, नरेश मारू, रामस्वरूप भाटी, बबलू मेहरा, राजीव जोशी साथ रहे।