नागौर में जैन समाज के पयुर्षण पर्व जारी, कल्पसूत्र का वाचन शुरू

धर्म-कर्म

नागौर // काली पोल स्थित कनक आराधना भवन में विराजमान खरतरगच्छ जैन साध्वी प्रियंकरा श्रीजी, प्रार्थना श्रीजी, प्रतिभा श्रीजी, प्रिसुधा श्रीजी, प्रणम्य श्रीजी एवं प्रसिद्धि श्रीजी के पावन निश्रा में नगीना नगरी नागौर में खरतरगच्छ संघ में पयुर्षण महापर्व हषोल्लास ओर उंमग के साथ में मनाया जा रहा है।

संघ के प्रदीप डागा एवं भास्कर खजांची ने बताया कि शुक्रवार को प्रातः 8:30 बजे हीरावाड़ी स्थित भास्कर मनोज खजांची के निवास स्थान से -गाजे- बाजे के साथ पोथा जी कनक आराधना भवन काली पोल ले जाया गया। जहां पर गंगाबाई , सुरेन्द्र, मीना देवी पारख ,मुंगेली (छत्तीसगढ़ )वालों के द्वारा जैन साध्वी प्रिंयकराश्रीजी को पोथा जी अर्थात कल्पसुत्र बहोराया गया। भद्र बाहु स्वामी रचित कल्प सुत्र का वाचन आज से शुरू हुआ।

खरतगच्छ जैन साध्वी प्रिंयकरा श्रीजी ने पयुर्षण महापर्व के तीसरे दिन धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिन चारित्र,स्थिरावली,साधु समाचारी का विस्तार से पयुर्षण महापर्व पर बताया जाता है। मुल बात यह है कि कोई भी धर्म आराधना करो जिसका एक लक्ष्य यह हों कि राग-देष कम होता जाए। कल्प सुत्र के अन्तर्गत भुगोल खगोल ज्योतिष शास्त्र का वर्णन है। मरू को मापना, समुद्र को मापना, नदीयों में रेत के कण को गिनना असम्भव है। वैसे ही कल्प सुत्र के एक एक शब्द को समझ पाना असम्भव है। कल्प सुत्र के हर शब्द में सिद्धीया है। कल्प सुत्र का विवेचन भद्र बाहु स्वामी ने किया। भगवान महावीर स्वामी के 27 भवों का वर्णन विशेष रूप से किया गया है। जीवन जीने कि कला, मृत्यु को कैसे महोत्सव मनाऐ यह सारी कलाऐ कल्प सुत्र में है |

हिरावाडी़ स्थित आदिनाथ जैन मंदिर में विकास बोथरा, प्रदीप डागा,कुशल खजांची एवं अंकित डागा के द्वारा भगवान आदिनाथ की आंगी रचना की गई। आंगी रचना के लाभार्थी प्रकाशचंद महावीरचंद बच्छावत परिवार वालों ने लिया। मंच संचालन केवलराज बच्छावत ने किया। कल्प खजांची ने बताया कि अक्षयनिधि तप ,पौषध, उपवास एकासना आदि चल रहे हैं। इस पर्व में करीब 25 तपस्यार्थी तपस्याऐ कर रहे हैं।