शनि अमावस्या पर केसरिया हनुमान मंदिर में श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ वट सावित्री पूजन

धर्म-कर्म

बीकानेर // शनि अमावस्या के पावन अवसर पर बीकानेर स्थित केसरिया हनुमान मंदिर, पुरानी गिनानी परिसर में महिलाओं द्वारा श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक विधि-विधान के साथ वट सावित्री व्रत एवं पूजन किया गया। इस अवसर पर मंदिर में सुबह से ही महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरे वातावरण में भक्ति एवं धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा।

मंदिर के पुजारी पंडित केशव शुक्ला ने महिलाओं को वट सावित्री व्रत का महत्व बताते हुए सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति में अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु एवं परिवार की सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने महिलाओं को पूजन की संपूर्ण विधि भी विस्तारपूर्वक बताई।

पूजन के दौरान महिलाओं ने सर्वप्रथम मंदिर में भगवान हनुमान के दर्शन किए तथा इसके बाद वट वृक्ष (बड़ के पेड़) के नीचे एकत्र होकर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने वट वृक्ष को जल अर्पित किया, रोली, मौली, अक्षत, पुष्प एवं प्रसाद चढ़ाया। इसके पश्चात पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि तथा पति की लंबी आयु की कामना की।

शनि अमावस्या के अवसर पर मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुति देकर सुख-समृद्धि एवं परिवार की मंगलकामना की। पंडित केशव शुक्ला ने बताया कि वट वृक्ष को त्रिदेवों का स्वरूप माना जाता है तथा इसकी पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और वैवाहिक जीवन में स्थिरता आती है। कथा श्रवण के बाद महिलाओं ने सामूहिक आरती में भाग लिया और धार्मिक भजनों का गायन भी किया। मंदिर परिसर में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में उत्साहपूर्वक पूजा-अर्चना कर भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं को जीवंत स्वरूप प्रदान किया।