डेहरु माता पाटोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब, महाआरती में हजारों श्रद्धालु हुए शामिल

धर्म-कर्म

तृतीय स्थापना दिवस पर भव्य आयोजन, समाज के प्रबुद्ध जनों का हुआ सम्मान

बीकानेर // नाल रोड स्थित गंगा सिंह विश्वविद्यालय के पास विराजमान कुलदेवी डेहरु माता मंदिर का तृतीय स्थापना दिवस एवं पाटोत्सव महोत्सव बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित महाआरती में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर माता के दरबार में हाजिरी लगाई। पूरे मंदिर परिसर में धार्मिक उल्लास का माहौल रहा।

आयोजन संयोजक जेठाराम पुरोहित एवं एडवोकेट पवन पुरोहित ने बताया कि दोपहर 12:15 बजे ब्रह्म गायत्री पीठ सागर के अधिष्ठाता श्री रामेश्वरानंद जी महाराज ‘दाता श्री’ के सान्निध्य तथा शंकरजी पुरोहित की अध्यक्षता में मुख्य धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। इससे पूर्व आचार्य पुखराज भादाणी के आचार्यत्व में विधि-विधान से अभिषेक एवं पूजन कराया गया। अभिषेक में बद्रीनारायण सूरजड़ा एवं सरला पुरोहित तथा सुनील पुरोहित एवं अनीता पुरोहित ने यजमान के रूप में भागीदारी निभाई।

महाआरती के बाद मंदिर समिति की ओर से समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रबुद्धजनों का सम्मान किया गया। इस दौरान बीकानेर बार एसोसिएशन अध्यक्ष एडवोकेट अजय पुरोहित, एडवोकेट कमल नारायण पुरोहित और समाजसेवी देवीलाल उपाध्याय को रामेश्वरानंद जी महाराज, शंकर पुरोहित एवं राजेश चूरा द्वारा सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। समिति के कोषाध्यक्ष मास्टर पवन पुरोहित एवं सतीश पुरोहित ने बताया कि बीकानेर शहर के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों से भी बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी एवं भक्तजन पहुंचे।
महाआरती में राजेश चूरा, डॉ. बालनारायण पुरोहित, गोकुल जोशी, कन्हैयालाल पुरोहित, नवनीत पुरोहित, दुर्गाशंकर आचार्य, एडवोकेट विजय आनंद पुरोहित, भरत पुरोहित, एडवोकेट नवल पुरोहित, रामरतन पुरोहित, संजय स्वामी, सुरेंद्र ओझा, नवरत्न ओझा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

ग्रामीण क्षेत्र प्रभारी नवलकिशोर (दारा महाराज) ने बताया कि बीटनोक, हुसंगसर, शोभासर, कल्याणसर, बिग्गा, श्रीकोलायत, कुम्हारों की ढाणी, गिरिराजसर, सूरजड़ा, गाड़ियाला और जाझूवाड़ी सहित विभिन्न गांवों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पाटोत्सव में शामिल हुए।