



बीकानेर के साहित्य समाज ने मनाया कवि- आलोचक सरल विशारद का 89 वां जन्म दिवस
बीकानेर // ‘सरल विशारद ने सरल विशारद होने के लिए बहुत कुछ खोया है। वे केवल विचारधारा के प्रति ही नहीं बल्कि मूल्यों के लिए भी प्रतिबद्ध रहे हैं।’
ये विचार रविवार को प्रख्यात कवि- आलोचक एवं नाटककार डॉ. नंदकिशोर आचार्य ने सुदर्शन कला दीर्घा, नागरी भंडार में कवि, आलोचक, एक्टिविस्ट एवं सम्पादक सरल विशारद के 89 वें जन्म दिवस पर आयोजित ‘सरल समारोह’ में अध्यक्षीय उद्बोधन के रूप में व्यक्त किए। डॉ. आचार्य ने कहा कि सरल विशारद ने अपना पूरा जीवन साहित्य को दिया है।आपातकाल के दौरान भी बेबाकी से विरोध के स्वर मुखरित करने वालों में सरल अग्रणी रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ चित्रकार हरिगोपाल हर्ष ‘सन्नू’ ने कहा कि विचार के प्रति सरल विशारद की अडिग निष्ठा नई पीढ़ी के लिए प्रेरक है। कार्यक्रम के आरम्भ लेखक- पत्रकार हरीश बी. शर्मा ने कहा कि सरल विशारद का सुदीर्घ साहित्यिक एवं सार्वजनिक जीवन विराट अनुभवों से भरा हुआ है।
उनकी ऊर्जा और सकारात्मकता युवाओं के लिए अत्यंत प्रेरक है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने सरल विशारद के व्यक्तित्व के विभिन्न पक्षों पर अपनी बात रखी। उनके प्रेरक व्यक्तित्व पर कवि- कथाकार राजेन्द्र जोशी ने अनेक दृष्टांत और संस्मरण साझा किए। राजस्थानी के कवि कथाकार कमल रंगा ने कहा कि सरल विशारद एक कुशल सम्पादक एवं सजग पत्रकार हैं। उन्होंने सम्वेत संस्थान के माध्यम से बीकानेर को अनेक यादगार आयोजन दिए हैं।
रंगकर्मी एवं कर्मचारी नेता अविनाश व्यास ने कहा कि सरल विशारद का रंगकर्म से गहरा जुड़ाव रहा है, वे संकल्प नाट्य समिति में लम्बे समय तक सक्रिय रहे हैं। राजस्थानी कवि विप्लव व्यास ने कहा कि सरल विशारद ने एक परिवार के मुखिया के रूप में सभी कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए भी रूढ़िवादिता को अपने जीवन में कभी भी प्रश्रय नहीं दिया। वरिष्ठ साहित्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि सरल विशारद की कविताएं समाज के लिए सदैव प्रासंगिक रहेंगी। उन्होंने कहा कि वे प्रतिरोध के कवि हैं, उनका रचनाकर्म विसंगतियों पर सीधे प्रहार करता है।
कार्यक्रम में प्रमोद कुमार शर्मा, नवनीत पांडे, मनीषा आर्य सोनी, इन्द्रा व्यास, मोनिका गौड़, जाकिर अदीब, बुनियाद हुसैन जहीन, डॉ. चंचला पाठक एवं आनंद मस्ताना ने सरल विशारद की कविताओं का वाचन किया। कवि- पत्रकार संजय आचार्य वरुण ने कहा कि पैंसठ- सत्तर साल के साहित्यिक जीवन को जीने वाले सरल विशारद अब एक व्यक्ति होने की सीमा से बाहर निकलकर ऐसे संस्थान बन चुके हैं जहां नई पीढ़ी के सृजनधर्मी शब्द और रचनाकर्म से संस्कारित होते हैं।
कार्यक्रम में अतिथियों और आगन्तुकों द्वारा सरल विशारद का अभिनंदन किया गया। अभिनंदन पत्र का वाचन रंगकर्मी रामसहाय हर्ष ने किया। कार्यक्रम में राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ के प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द माथुर ने भी सरल विशारद के व्यक्तित्व पर अपनी बात रखी।
ये रहे मौजूद
समारोह में दीपचंद सांखला, डॉ. अजय जोशी, डॉ. ब्रजरतन जोशी, मुकेश व्यास, डॉ. बसंती हर्ष, महेश उपाध्याय, डॉ. नमामीशंकर आचार्य, राजाराम स्वर्णकार, जुगलकिशोर पुरोहित, प्रेमनारायण व्यास, लक्ष्मीनारायण व्यास, महेश कुमार जोशी, कासिम बीकानेरी, सीमा जैन, राजेन्द्र स्वर्णकार, मदन जैरी, हरिकिशन व्यास, कविता व्यास,महेन्द्र जोशी, विशन मतवाला, गोपाल कुंठित, डॉ. एस एन हर्ष, कैलाश टाक, हनुमंत गौड़, संजय पुरोहित, बाबूलाल छंगाणी, आत्माराम भाटी, अनिरुद्ध उमट, मुरली पुरोहित, कौशलेंद्र गोस्वामी, कमल किशोर पारीक एवं डॉ. गौरीशंकर प्रजापत सहित अनेक रचनाकार एवं साहित्य अनुरागी उपस्थित रहे। शायर एवं लेखक इरशाद अज़ीज़ ने आगन्तुकों के प्रति आभार प्रकट किया।



