लालगढ़ स्टेशन पर ट्रेन हादसे का सीन, दो कोच क्षतिग्रस्त दिखाए; राहत-बचाव का अभ्यास

प्रशासन

मॉक ड्रिल में रेलवे, पुलिस, मेडिकल टीम और दमकल की तैयारियां परखीं, मौके पर पहुंचने का समय भी नोट किया

बीकानेर। लालगढ़ रेलवे स्टेशन पर बुधवार को ट्रेन दुर्घटना की मॉक ड्रिल की गई। इसमें ट्रेन के दो कोच क्षतिग्रस्त होने और कुछ यात्रियों के घायल होने का दृश्य बनाया गया। अचानक अफरा-तफरी जैसा माहौल बना, लेकिन यह दुर्घटना नहीं, बल्कि आपात स्थिति में राहत एवं बचाव व्यवस्थाओं को परखने के लिए किया गया अभ्यास था।
मॉक ड्रिल के दौरान 19720 ट्रेन के दो कोच क्षतिग्रस्त दिखाए गए। इसके बाद घायल यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया गया। रेलवे के साथ पुलिस, मेडिकल इमरजेंसी टीम, एंबुलेंस और दमकल की टीमों के मौके पर पहुंचने का समय नोट किया गया। साथ ही रेस्क्यू वाहनों की पहुंच, संबंधित एजेंसियों की तत्परता और जिम्मेदारी संभालने की प्रक्रिया का आकलन किया गया। ज्यादातर वाहन समय पर मौके पर पहुंचे और संबंधित टीमों ने अपनी जिम्मेदारियां संभालीं।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी रेल दुर्घटना या अन्य आपात स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और राहत-बचाव की तैयारियों को जांचना था। ऐसे अभ्यास से वास्तविक दुर्घटना के समय घायलों को सुरक्षित निकालने और तत्काल राहत पहुंचाने में मदद मिलती है। लालगढ़ रेलवे स्टेशन और बीछवाल स्थित बॉटलिंग प्लांट पर समय-समय पर इस तरह की मॉक ड्रिल की जाती है।

रेलवे सहित कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद

मॉक ड्रिल के दौरान एडीआरएम राजेंद्र सिंह चौधरी, एसीएम लालचंद कुम्हार, आरपीएफ के सीएमओ सुनील जजड़ा, असिस्टेंट कमांडेंट प्रवीण पूनिया सहित रेलवे के अधिकारी और कार्मिक मौजूद रहे। एनडीआरएफ और एसआरडीएफ के स्वयंसेवकों ने भी अभ्यास में भाग लिया।