




प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी का कड़ा ऐतराज; कहा—बिना विशेषज्ञ सलाह के काम, ऐतिहासिक स्वरूप बिगड़ने का खतरा
बीकानेर // ऐतिहासिक जूनागढ़ किला इन दिनों रंग-रोगन के काम को लेकर विवादों में घिर गया है। करीब 16वीं सदी में राजा रायसिंहजी द्वारा स्थापित इस भव्य किले की बाहरी दीवारों पर चल रहे पेंट कार्य को लेकर विरासत संरक्षण पर सवाल उठने लगे हैं।

1589 ई. में शुरू हुआ था इसका निर्माण
किले का निर्माण 1589 ई. में शुरू हुआ था और यह अपनी लाल बलुआ पत्थर की वास्तुकला, महलों और संग्रहालय के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। 1902 तक यह बीकानेर के शासकों का निवास स्थान रहा, जहां महाराजा गंगासिंहजी भी रहे। अब इस ऐतिहासिक धरोहर पर हो रहे रंग-रोगन के काम को लेकर प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि यह कार्य बिना किसी सर्वे, विशेषज्ञ सलाह और कानूनी मानकों के किया जा रहा है, जिससे किले का मूल स्वरूप प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किले पर इस्तेमाल किया जा रहा रंग न केवल निम्न स्तर का है, बल्कि यह मूल रंग से भिन्न है, जिससे इसकी ऐतिहासिक पहचान और भव्यता को नुकसान पहुंच रहा है। प्रिंसेस ने इसे राष्ट्रीय धरोहर के साथ खिलवाड़ बताते हुए तुरंत काम रोकने की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर इस मामले को कोर्ट तक ले जाया जाएगा।
गौरतलब है कि महाराजा डॉ. करणीसिंहजी ने अपने जीवनकाल में किले के मूल स्वरूप को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया था और इसके संरक्षण के लिए ट्रस्ट भी स्थापित किए थे। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित संस्थाएं इस विवाद पर क्या कदम उठाती हैं और क्या इस ऐतिहासिक धरोहर की मौलिकता को बचाया जा सकेगा।



