संस्मरण विधा साहित्य के साथ-साथ इतिहास भी – डाॅ. आचार्य
स्व. शिवराज छंगाणी की पुस्तक ‘ओळूं रै ओळावै‘ का लोकार्पण बीकानेर // वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. नंदकिशोर आचार्य ने कहा कि संस्मरण विधा साहित्य के साथ-साथ इतिहास भी होती है। संस्मरण में वर्णित घटनाओं-व्यक्तियों के गुण-दोष स्पष्ट रूप से पाठकों के सामने आने चाहिए। ओळूं रै ओळावै पुस्तक के माध्यम से लेखकों-शोधार्थियों को साहित्यिक-इतिहास लेखन के […]
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