



राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी डॉ नितिन गोयल ने प्रेस वार्ता में दी जानकारी
बीकानेर // बीते माह दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सानिध्य में आयोजित हुई अंतरराष्ट्रीय एआई समिट के बाद अब राजस्थान में प्रथम एआई कॉन्फ्रेंस 14-15 मार्च को बीकानेर में होने जा रही है। इस दो दिवसीय सेमिनार में पांडुलिपियों व ऐतिहासिक अभिलेख के अध्ययन में एआई की भूमिका पर मंथन होगा। इसका आयोजन राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान बीकानेर में होगा। आयोजन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। इस दौरान देश भर के एआई विशेषज्ञ इस कांफ्रेंस में हिस्सा लेंगे। यह जानकारी शुक्रवार को राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान में आयोजित एक प्रेस वार्ता में संस्थान के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी तथा कॉन्फ्रेंस के संयोजक डॉ नितिन गोयल ने दी।
कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक गोमती शर्मा (आरएएस), निदेशक RORI जोधपुर हैं।

डॉ गोयल ने बताया कि राजस्थान ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (RORI) बीकानेर की ओर से 14 व 15 मार्च 2026 को होने वाली इस कॉन्फ्रेंस में देश और विदेश के विद्वान, शोधकर्ता तथा विशेषज्ञ भाग लेकर पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अध्ययन, संरक्षण और डिजिटाइजेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स (एआई) की भूमिका पर चर्चा करेंगे।
यह है कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य
कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य पांडुलिपियों और ऐतिहासिक अभिलेखों को आधुनिक तकनीक की सहायता से सुरक्षित रखने और उन्हें अधिक सुलभ बनाने की दिशा में नए विचारों और शोध को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के दौरान एआई आधारित डिनिटाइजेशन, मशील लर्निंग द्वारा प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान, हस्तलिखित ग्रंथों के ट्रांसक्रिप्शन, अनुवाद और डेटा तैयार करने जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही एआई के उपयोग से जुड़े नैतिक पहलुओं, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और जिम्मेदार उपयोग पर भी विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे।
शोधार्थी अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे
कॉन्फ्रेंस में भाषाविद, इतिहासकार, अभिलेख विशेषज्ञ, पुस्तालयकालय से जुड़े विद्वान और शोधार्थी भाग लेकर अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। इस आयोजन से पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के संस्क्षण और अध्ययन में नई संभावनाओं पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है। डॉ नितिन गोयल ने मीडिया को बताया कि यह अंतरराष्ट्रीय फॉस राजस्थान ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीन्यूट, बीकानेर परिसर में आयोजित होगी, जिसमें ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से भी प्रतिभागियों के जुड़ने की व्यवस्था की गई है। आयोजकों के अनुसार इस सम्मेलन के माध्यम से पांडुलिपियों और ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण में आधुनिक तकनीक के उपयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद हैं। अंत मे आयोजन के पोस्टर का भी विमोचन किया गया। इस दौरान जिला परिषद के आईसी कॉर्डिनेटर गोपाल जोशी भी मौजूद रहे।




