


टेंट में परीक्षा, कीचड़ में बैठे विद्यार्थी, एक घंटे देरी से मिले प्रश्नपत्र, फोटोकॉपी बांटी गई; 5 हजार परीक्षार्थियों की भीड़ के बीच परीक्षा रद्द होने के बाद नोडल अधिकारी को सौंपा ज्ञापन
बीकानेर // पैरामेडिकल (DECGT) प्रथम वर्ष की परीक्षा व्यवस्था को लेकर विद्यार्थियों में भारी आक्रोश है। विद्यार्थियों ने नोडल अधिकारी को शिकायत पत्र सौंपकर जयपुर के परीक्षा केंद्र पर हुई अव्यवस्थाओं की निष्पक्ष जांच कराने तथा आगामी परीक्षाएं बीकानेर जिला मुख्यालय पर आयोजित करवाने की मांग की है।
विद्यार्थियों ने बताया कि प्रथम वर्ष की परीक्षाएं 29 जून से 1 जुलाई तक जयपुर के कालवाड़ रोड स्थित श्रीमती प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज में निर्धारित की गई थीं। यह परीक्षा केंद्र शहर के मुख्य क्षेत्र से करीब 40 किलोमीटर दूर खेतों के बीच स्थित होने के कारण विद्यार्थियों को वहां पहुंचने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्त सुविधा नहीं होने तथा आसपास ठहरने और भोजन की समुचित व्यवस्था के अभाव में विद्यार्थियों को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक कठिनाइयों से गुजरना पड़ा।
शिकायत के अनुसार परीक्षा केंद्र पर मुख्य भवन के बजाय टेंटों में परीक्षा आयोजित की गई। बारिश के कारण कई स्थानों पर कीचड़ होने से विद्यार्थियों को असुविधा के बीच परीक्षा देनी पड़ी। केंद्र पर बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव रहा। भीषण गर्मी के कारण कई विद्यार्थी अस्वस्थ हो गए, जबकि क्षमता से अधिक परीक्षार्थियों को एक ही कक्ष में बैठाया गया।
विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि परीक्षा शुरू होने के निर्धारित समय के लगभग एक घंटे बाद प्रश्नपत्र वितरित किए गए। इतना ही नहीं, मूल प्रश्नपत्रों के स्थान पर फोटोस्टेट प्रतियां बांटी गईं, जिससे परीक्षा केंद्र पर भ्रम और अव्यवस्था का माहौल बन गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि परीक्षा केंद्र पर किसी प्रकार की प्रभावी प्रशासनिक या पुलिस व्यवस्था नहीं थी। लगभग पांच हजार परीक्षार्थियों की मौजूदगी के बीच हालात इतने बिगड़ गए कि अंततः संबंधित प्राधिकरण को परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
विद्यार्थियों क्रमश मयंक पुरोहित, माया भादानी, मोहित सरकार, सुजल देवड़ा, महक चौधरी, नजीब खान, विकास प्रजापति, प्रशांत शर्मा आदि ने कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बाद पेपर लीक जैसी घटनाओं ने उनका मनोबल तोड़ दिया है। इससे उन्हें मानसिक तनाव के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
इन विद्यार्थियों ने मांग की है कि छात्रहित को ध्यान में रखते हुए आगामी परीक्षाएं बीकानेर में या जिला स्तर पर ही आयोजित करवाई जाएं, ताकि उन्हें अनावश्यक यात्रा, अतिरिक्त खर्च और असुरक्षित माहौल का सामना न करना पड़े। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर भविष्य में ऐसी अव्यवस्थाओं की पुनरावृत्ति रोकने की भी मांग की गई है।



