घर के इक कोने में’ का लोकार्पण: युवा कवि सुमीत रंगा की कविताएं संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति

साहित्य

मालचन्द तिवाड़ी बोले- नई काव्य भाषा की खोज में सफल हैं सुमीत, साहित्यकारों ने कहा- उनकी रचनाएं रिश्तों और समाज की गहरी पड़ताल करती हैं

बीकानेर। प्रज्ञालय संस्थान की ओर से युवा कवि सुमीत रंगा के दूसरे काव्य संग्रह ‘घर के इक कोने में’ का लोकार्पण गुरुवार को नत्थूसर गेट के बाहर स्थित लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन-सदन में आयोजित समारोह में किया गया। कार्यक्रम में शहर के वरिष्ठ साहित्यकारों, कवियों और साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रही।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं आलोचक मालचन्द तिवाड़ी ने कहा कि सुमीत रंगा की कविताएं संवेदना के धरातल पर अनुभूतियों की गहरी व्यंजना प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि युवा कवि ने केवल नए विषयों को ही नहीं चुना, बल्कि नई काव्य भाषा की खोज में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी रचनाओं में स्मृतियों, रिश्तों और जीवन के सूक्ष्म अनुभवों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया है।

मुख्य अतिथि डॉ. मदन सैनी ने कहा कि सुमीत की कविताएं पाठकों को भीतर तक झकझोरने और सोचने के लिए प्रेरित करती हैं। समाज के महत्वपूर्ण पक्षों को उन्होंने सरल लेकिन प्रभावी भाषा में प्रस्तुत कर कविता को नए आयाम दिए हैं।

विशिष्ट अतिथि मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में रिश्तों की बदलती संवेदनाओं को समझना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सुमीत रंगा ने इन्हें अपने काव्य मुहावरे में बेहद प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया है।

इस अवसर पर सुमीत रंगा ने अपनी चार चर्चित कविताओं का पाठ कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. फारूक चौहान ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि वरिष्ठ शायर कासिम बीकानेरी ने कवि के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। संचालन कासिम बीकानेरी ने किया और अंत में गिरिराज पारीक ने आभार व्यक्त किया।

समारोह में कमल रंगा, जुगल किशोर पुरोहित, शिवप्रकाश शर्मा, राजेश रंगा, हरिनारायण आचार्य, आशीष रंगा, नवनीत व्यास, हेमलता व्यास, नेहा भोजक सहित अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।