



एमजीएसयू में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर कार्यक्रम; कुलगुरु बोले— जंगल और रेगिस्तानी जीव-जंतु ही असली विकास व पहचान
बीकानेर // महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय एवं राजस्थान राज्य जैव विविधता मंडल के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के आसपास स्थित नाल बड़ी, नोखा दहिया, नापासर, किल्चू, कल्याणसर, उदासर, कोटड़ी और स्वरूपदेसर सहित विभिन्न गांवों के ग्रामीणों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित ने की। उन्होंने कहा कि जैव विविधता केवल पेड़-पौधों तक सीमित नहीं है, बल्कि रेगिस्तान में पाए जाने वाले चूहे, टिड्डियां, तितलियां, कीट-पतंगे, पशु और वृक्ष भी इसकी महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं जीवों और वनस्पतियों से रेगिस्तान की वास्तविक पहचान बनती है। कुलगुरु ने मानवीय गतिविधियों से जैव विविधता पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों पर चिंता जताते हुए कहा कि जंगलों को यथावत बनाए रखना ही वास्तविक विकास है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में जैव विविधता पार्क विकसित किया गया है, जहां वन्य जीवों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ।
कार्यक्रम की सचिव डॉ. लीला कौर ने मंच संचालन करते हुए स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले प्रयासों के वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला। पर्यावरण विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार छंगाणी ने कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित, वित्त नियंत्रक देवेन्द्र सिंह राठौड़ एवं शुष्क बागवानी केंद्र के विभागाध्यक्ष प्रो. धूरेन्द्र सिंह का स्वागत किया।
प्रो. छंगाणी ने थार मरुस्थल की जैव विविधता एवं उसके संरक्षण पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, संकटग्रस्त रेगिस्तानी पशु-पादप, जल संरक्षण तकनीकों और खेती के बदलते स्वरूप पर ग्रामीणों से चर्चा करते हुए उन्हें संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
शुष्क बागवानी केंद्र के विभागाध्यक्ष प्रो. धूरेन्द्र सिंह ने जलवायु और फसलों की विविधता पर जानकारी दी। उन्होंने फसल उत्पादन में नई तकनीकों के उपयोग और उनके प्रभाव को विस्तार से समझाया।
वन विभाग से पहुंचे जिला वन अधिकारी संदीप कुमार छलाणी एवं सहायक वन संरक्षक डॉ. पूजा पंचारिया ने पेटेंट, बायोडायवर्सिटी रजिस्टर और बायोपायरेसी जैसे विषयों पर ग्रामीणों और विद्यार्थियों को जानकारी दी। इस दौरान ग्रामीणों ने भी अपने अनुभव और विचार साझा किए। समापन सत्र में प्रोफेसर राजाराम चोयल ने जैव विविधता की निगरानी के लिए पर्यावरण सहायक पद को महत्वपूर्ण बताते हुए वन विभाग से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
कार्यक्रम में शोधार्थी प्रियंका जांगिड, प्रमिला सोलंकी, जयकिशन छंगाणी तथा विद्यार्थियों ज्योति जोशी, प्रियव्रत पाण्डे, रोहित, श्वेता, मानसी, अनिल पूनिया और सुनील पूनिया ने सहयोग किया।
इस अवसर पर डॉ. सीमा शर्मा, डॉ. प्रगति सोबती, डॉ. संतोष कंवर शेखावत, डॉ. गौतम मेघवंशी, डॉ. धर्मेश हरवानी, डॉ. अभिषेक वशिष्ठ, उप कुलसचिव डॉ. प्रकाश सारण, सहायक कुलसचिव डॉ. सुरेन्द्र गोदारा, कर्मचारी कल्याण समिति अध्यक्ष कृष्ण जाट एवं महासचिव सुभाष सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक और कर्मचारी मौजूद रहे। राजस्थानी के अतिथि शिक्षक रामोवतार उपाध्याय ने जैव विविधता विषय पर राजस्थानी भाषा में कविता पाठ भी किया।



