अंतराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के तहत जागरूकता शिविर आयोजित

प्रशासन

नागौर // अंतराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के अन्तर्गत सोमवार को महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बख्तसागर में नाबार्ड जिला विकास प्रबन्धक मोहित चौधरी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित किया गया। जिसमें सहकारी समितियां के उप रजिस्ट्रार गंगाराम गोदारा द्वारा स्कुली छात्रों को सहकारिता संरचना एवं बैंक के बारे में अवगत करवाते हुए उन्होंने सहकारी बैंकों की प्रणाली की जानकारी देते हुए बताया कि इनकी प्रणाली लोकतान्त्रिक होती है। इनके सदस्य ही इनके मालिक होते है व मिलकर एक साथ “सब एक के लिए एक सब के लिए” की अवधारणा पर कार्य करते है।

उन्होंने बताया कि सहकारिता संरचना तीन स्तर पर विभाजित की गई है, जिसमें प्राथमिक स्तर पर गांव या कस्बे के लोग मिलकर सहकारी समिति बनाते है, जिला स्तर पर केन्द्रीय सहकारी बैंक एवं राज्य स्तर पर राज्य सहकारी बैंक स्थापित है। यह एक पैरामिड की तरह काम करता है। जहां नीचे की इकाईयां मिलकर ऊपर की इकाईयों को बनाती है। जिला विकास प्रबन्धक नाबार्ड चौधरी द्वारा छात्रों को बैंकिंग क्राईम यथा खातों को किराये पर देने एवं स्वयं सजकता से निजी जानकारी का आदान-प्रदान करने के बारे में अवगत करवाते हुए बताया कि सहकारी समितियों एवं बैकों की गतिविधियां व्यापक होती है। सहकारी बैंक स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। प्रबन्ध निदेशक बैंक जयपाल गोदारा ने छात्रों को साइबर सुरक्षा और ऑनलाईन बैकिंग के बारे में अवगत करवाते हुए बताया कि छात्र स्वयं एवं अपने परिजनों के साथ यह साझा करे कि किसी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक खाते की जानकारी या ओटीपी साझा न करें, अपने ई-मेल व ऑनलाईन बैकिंग हेतु मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें यह फिशिंग के प्रयास हो सकते है जहां धोखेबाज आपकी जानकारी चुराने का प्रयास कर रहा होगा। प्रबन्ध निदेशक गोदारा द्वारा इसके अतिरिक्त सहकारी बैंकों की प्रणाली के बारे में अवगत करवाया कि इनका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि अपने सदस्यों की सेवा करना होता है। यह बैंक लोगो के एक समूह द्वारा मिलकर बनाए जाते है, जो एक सामान आर्थिक या सामाजिक उद्देश्य रखते है। सहकारी बैंकों की लोकतान्त्रिक प्रणाली होती है। इस प्रकार अधिकारियों द्वारा छात्रों को महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।