



नागौर-दुबई की बसावट व बनावट को देख माधुरी मच्छी ने लिया आर्टिटेक्ट बनने का निर्णय, आज लंदन सहित कई देशों में आदर से लिया जाता है उनका नाम
अच्छाई की मार्केटिंग: नागौर जैसे छोटे शहर से निकल लंदन की सबसे युवा आर्टिटेक्ट बन माधुरी ने परिवार सहित कई कंपिनयों को चौंकाया

ये प्रोफाइल एक ऐसी युवती की है। जिन्होंने बेहद कम उम्र में ही आर्टिटेक्ट बनकर न केवल अपने परिवार या समाज को बल्कि अरब देशों सहित यूरोपीय देशों को चौंका दिया। इस प्रोफाइल में संघर्ष भी बहुत है और सफलताएं भी। इसलिए यहां हम संघर्ष के सक्सेस हुई युवती की अच्छाई की मार्केटिंग करने जा रहे हैं जो एक लेखक का रचना धर्म भी है। ये सक्सेस स्टोरी है राजस्थान के छोटे शहर नागौर से निकली एक युवती माधुरी मच्छी (जैन) की। उन्होंने कड़ा संघर्ष कर वैचारिक जीत हासिल कर न केवल बडी बड़ी बिल्डिंगों का भव्य निर्माण कराया बल्कि ये भी साबित किया कि आर्टिटेक्ट की लाइन केवल पुरुषों की नहीं है क्योंकि इस लाइन में पुरूर्ष वर्ग का आधिपत्य था जिसे एक पतली दुबली युवती ने पूरे मनोयोग के साथ तोड़ दिया और आज वे छोटे शहर की बड़ी प्रोफाइल बन चुकी है। तो आइए जानते हैं कि माधुरी मच्छी के संघर्ष की कहानी।
धार्मिक परिवार में हुआ जन्म, बचपन से ही मेधावी रही है माधुरी
माधुरी का जन्म नागौर शहर के श्री पन्नालाल मच्छी के यहां कोई तीन दशक पहले हुआ था। ये इनके दादा थे। मच्छी जैन परिवार दिगम्बर जैन धर्म का उपासक है। घर में माधुरी ने होश संभालते ही धार्मिक माहौल देखा। धर्म के साथ साथ ये परिवार बालिका शिक्षा को भी महत्व देता था। माधुरी ने बचपन में अपनी प्रारंभिक शिक्षा नागौर के ही आंकाक्षा स्कूल और इमैनुएल स्कूल से हासिल की। करीब 7 वर्ष की आयु में वे पहली बार दुबई गई। वहां की चकाचौंध व गगनचुंबी इमारतों को देख उसमें खो गई। उसे नई दुनिया बहुत अच्छी लगी मगर नागौर में ऐसी गगनचुबी इमारतें न होने का उन्हें दुख भी होता रहता था। फिर उन्होंने नागौर की तुलना दुबई से की और यह तय किया भविष्य में जब वे बडी युवती बन जाएगी तब ऐसी ही इमारतों का निर्माण करेगी। कालांतर में उसने दुबई में ही रहकर गुल्फ इंडियन स्कूल और इंडियन हाई स्कूल से माध्यमिक शिक्षा ग्रहण की। जैसा कि माधुरी बताती है कि शुरूआत में उन्हें अंग्रेजी और नए सांस्कृतिक माहौल में तालमेल बैठाने में बड़ी कठिनाई हुई लेकिन उन्होंने विज्ञान और गणित जैसे दुरूह विषयों में अच्छा प्रदर्शन व अच्छे अंक हासिल कर वास्तुकला की नींव रख दी। यही वजह है कि उसका सपना आज साकार हो गया है।

पिता जितेन्द्र मच्छी है दुबई के कारोबारी
माधुरी के पिता जितेन्द्र मच्छी दुबई में स्कैफोल्डिंग व हार्डवेयर के बडे कारोबारी है। हैंड टूल्स निर्माण इनका खानदानी काम था। नागौर को इसीलिए औजार नगरी कहते हैं क्योंकि नागौर में निर्मित हैंड टूल्स की आज भी विश्वसनीयता बरकार है। पिता जितेन्द्र जी पहले नागौर में ही ये कारोबार करते थे फिर परिजनों ने जालंधर में और बाद में दुबई में ये कारोबार खडा किया।
सबसे पहले एक नजर माधुरी के परिवार पर
• पिता: श्री जितेन्द्र मच्छी
• माता: श्रीमती राजुल मच्छी
• भाई: अंकित मच्छी
• बहन: हर्षिता मच्छी
• स्वयं: माधुरी मच्छी
इस तरह मिली माधुरी को वास्तुकार बनरे की प्ररेणा
दरअसल राजस्थान हवेलियों का राज्य कहलाता है। पश्चिमी राजस्थान तो हवेलियों का गढ़ रहा है। आप बीकानेर से होते हुए नागौर, जोधपुर, बाडमेर व जैसलमेर जाएंगे तो आपको मध्यकाल में निर्मित अनेक शानदार नक्काशीदार हवेलियां आज भी सीना ताने खड़ी दिखाई देगी। राजस्थान की झलक इन हवेलियों में आज भी देखी जा सकती है। नागौर भी मध्यकाल में एक सम़ृद्ध स्टेट हुआ करता था। यहां के किले, बावडी और हवेलियां आज भी देखने लायक था। माधुरी जिस हवेली में रहती थी वो एक हवादार व नक्काशीदार शानदार पत्थर से बनी हवेली थी तो बचपन से ही घर में वास्तुकला को करीब से देखने व समझने का उन्हें मौका मिल गया था। लेकिन जब माधुरी युवावस्था में आई तो उसे दुबई की गगनचुंबी इमारतों के बीच अपने शहर नागौर की हवेलियों के बीच अंतर देख वह सोचती थी कि क्या हम अपी सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने और उन्हें विकसित करने के लिए क्या क्या कर सकते हैं। यही से उन्हें वास्तुशिल्पी बनने की जिज्ञासा पैदा हुई और इस आधार पर वो आज दुबई सहित अनेक यूरोपीय देशों में बतौर वास्तुकार स्थापित हो चुकी है।
दुबई व अमेरिका से स्नातक डिग्री लेकर हासिल किया वास्तुकार का ज्ञान
माधुरी ने अपनी स्नातक डिग्री अमेरिकन यूनिवर्सिटी इन दुबई (AUD) से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने लंदन के Architectural Association Design Research Lab (AADRL) से Masters in Architecture and Urbanism किया। मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद वे भी थमी नहीं न रूकी। उन्होंने निरंतर वास्तुकला में सिद्धहस्त होना का फैसला किया और निरंतर अपना ज्ञान बढ़ाने में लगी रही और इसी कड़ी में उन्होंने वास्तुकला में शोध भी किया। उनकी थीसिस थी “Vortexure”, एक समूह प्रोजेक्ट जिसे Patrik Schumacher और Pierandrea Angius के निर्देशन में किया गया।
इसमें यह शोध में यह साबित किया कि, क्या भविष्य के दफ्तर AI, मशीन लर्निंग, और किनेटिक आर्किटेक्चर के ज़रिए स्वतः उत्तरदायी और लचीले हो सकते हैं, जो कामकाजी ज़रूरतों के अनुसार बदल सकें। उनकी थिसीस में भारत से माधुरी मच्छी के साथ बुल्गारिया से मिरोस्लाव नसकोन, चीन से ची लियूत व ज़ियानफैंग चान थे।

इन मंचों पर उनका प्रोजेक्ट हो चुका है प्रदर्शित व सम्मानित
• Amazing Architecture
• AADRL Official Page
• Parametricism.com
• Parametric Semiology
• AADRL 2020 Projects Review
• DigitalFUTURES Young (YouTube)
• Forum Vertigo 2020
• AUD Honour Award
• ArchDaily – AUD Showcase
माधुरी को मिल चुके हैं ये प्रमुख सम्मान
• The Architecture MasterPrize – Honourable Mention (Commercial Architecture)
• Inspireli Awards – Future of Work Category
वास्तुकार बनते ही सर्विस के कई ऑफर मिले
जैसे ही माधुरी ने अपनी थिसीस कंपलीट की और एक वास्तुशिल्पी के रूप में अपने आपको दुनिया के सामने रखा तो उन्हें दुबई सहित कई देशों से अच्छी सर्विस के ऑफर आने लगे। धीरे धीरे उन्होंने सब ऑफर स्वीकार कर अपने कार्य को धार दी और गुणवत्ता हासिल की। उन्होंने शुरूआत की दुबई की Edifice Consultants Pvt. Ltd.,से। इसके बाद PNC Architects, SOBHA Developers की इन-हाउस फर्म, Sichau & Walter Architekten GmbH – जर्मनी, Studio Fuksas – इटली प Sybarite Architects – लंदन, यूके में भी अपने बेहतर काम का शानदार प्रदर्शन कर सबको अभिभूत कर दिया। वर्तमान में वे लंदन में एक 3D डिज़ाइन टीम की सह-नेता (Sub-lead) हैं।
40 से अधिक अंतरराष्ट्रीय वास्तु परियोजनाओं में सक्रिय योगदान है माधुरी का
एक वास्तुकार व वास्तुशिल्पी में प्रतिस्थापित होने के बाद माधुरी मच्छी ने पीछे मुडकर नहीं देखा। उन्होंने यूएई सहित सऊदी अरब, चीन, इटली, मोनाको, जर्मनी सहित अनेक देशों में एक के बाद एक कुल 40 प्रोजेक्टस पर काम किया और हर बार नवाचार किया जिसके परिणाम स्वरूप उन्हें 32 देशों के भ्रमण का मौका मिला और 5 देशों में तो उनका स्थाई निवास ही हो गया। उन्होंने विभिन्न आवासीय, व्यावसायिक, सांस्कृतिक, खुदरा और हेरिटेज परियोजनाओं में आरंभिक डिज़ाइन से लेकर निर्माण तक की जिम्मेदारी निभाई है।
ये हैं उनके प्रमुख प्रोजेक्टस
• NEOM The Line और NEOM Airport – सऊदी अरब
• SKP Guangzhou, Wuhan SKP – चीन
• Dubai Creek Harbour Mall – यूएई
• Pisa Montachallio Tower – इटली
• Fontvieille Mall – मोनाको
• Stadtschloss Wiesbaden – जर्मनी
माधुरी ने इन देशों की यात्रा की
माधुरी मच्छी ने अपने काम से भारत, यूएई, ओमान, थाईलैंड, अमेरिका, लंदन, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, जर्मनी, इटली, लक्ज़मबर्ग, स्पेन, फ्रांस, मोनाको, स्कॉटलैंड, उत्तरी आयरलैंड, चैनल आइलैंड, नीदरलैंड्स, फिनलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, तुर्की, ऑस्ट्रिया, मोरक्को, बेल्जियम, स्विट्ज़रलैंड, ग्रीस, हंगरी, चेक गणराज्य आदि की कई बार यात्राएं की और हर बार कुछ न कुछ नया सीखा और उन्हें अपने वर्क में साबित भी किया। यही वजह है कि बतौर वास्तुकार उन्हें अनेक देशों में आदर मिल रहा है। फिलहाल वे अभी लंदन में निवास कर रही है।
और अंत में – बकौल माधुरी …
जब उनसे पूछा गया कि एक महिला आर्किटेक्ट के रूप में माधुरी के अनुसार आर्किटेक्ट का वर्तमान महत्व क्या है? इस प्रश्न पर उनका जवाब हर किसी के दिल को छू लेने वाला है। उन्होंने कहा कि “आज का आर्किटेक्ट सिर्फ इमारतें नहीं बनाता बल्क वह इतिहास और नवाचार, तकनीक और संस्कृति के बीच सेतु होता है। उन्होंने बताया कि वास्तुकला का कार्य केवल सजावटी घर बनाना नहीं है — यह है समाज की बड़ी समस्याओं को पहचानना, शहरी जीवन को सशक्त बनाना, और समुदायों के लिए सार्थक स्थान गढ़ना। माधुरी बताती है कि एक महिला वास्तुकार होने के नाते मैंने दुनिया के कई देशों में काम करते हुए यह महसूस किया कि लैंगिक असमानताएँ आज भी मौजूद हैं — बस उनका रूप अलग होता है। इससे मेरे भीतर यह एहसास और मजबूत हुआ कि मेरी भूमिका केवल डिज़ाइन करने की नहीं, बल्कि प्रश्न उठाने, मार्ग प्रशस्त करने, और प्रतिनिधित्व करने की भी है। अंत में जब माधुरी जी से पूछा गया कि वे अपने होम टाउन नागौर शहर की बेटियों के लिए क्या कहना चाहती है तो उन्होंने कहा कि वे पूरी धरती की बेटियों के लिए कहूंगी कि – बाहर निकलो। दुनिया देखो। यात्रा करो। सवाल पूछो। दुनिया बहुत बड़ी है, और उसकी संभावनाएँ तुम्हारे इंतज़ार में हैं। वास्तुकला मेरे लिए अब एक पेशा नहीं, बल्कि दूसरों को भी उड़ान देने का ज़रिया भी है।”
(जैसा कि उन्होंने “उदय भास्कर” के एडिटर प्रमोद आचार्य को बताया)



