ज्ञान है मनुष्य का सबसे मूल्यवान धन : समणी डॉ. सुगमनिधि

धर्म-कर्म

आध्यात्मिक ज्ञान-ध्यान संस्कार शिविर आयोजित

नागौर // आचार्य जयमल जैन मार्ग स्थित जयमल जैन पौषधशाला में आयोजित चातुर्मास विशेष प्रवचन श्रृंखला में रविवार को समणी डॉ. सुयशनिधि ने भगवान महावीर स्वामी के अद्भुत पूर्वभव त्रिपृष्ठ वासुदेव की गाथा को प्रस्तुत किया। समणी ने संबोधित करते हुए कहा कि त्रिपृष्ठ वासुदेव एक अत्यंत पराक्रमी, बुद्धिमान और विजयी सम्राट थे। उन्होंने अश्वग्रीव से संग्राम किया और विजय प्राप्त की। उनका जीवन ऐश्वर्य, सामर्थ्य और पराक्रम का प्रतीक था। किंतु इतनी अपार विजय और विकास के बावजूद वे आंतरिक शांति और आध्यात्मिक संतोष से वंचित थे। वासुदेव निदानकृत होने के कारण अध्यात्म से कोसों दूर होते हैं। यही वह मोड़ था जहाँ विकास, विनाश में परिवर्तित होने लगा। प्रवचन में यह स्पष्ट किया गया कि सच्चा विकास केवल बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि आत्मा की उन्नति से होता है। जब अहंकार, हिंसा और प्रतिस्पर्धा हमारे भीतर बढ़ती है, तब चाहे जितनी भी बाहरी जीत हो, वह भीतर से हमें खोखला कर देती है। त्रिपृष्ठ वासुदेव का जीवन यही सिखाता है कि विकास की दौड़ में अगर आत्मा पीछे छूट जाए तो वह अंततः विनाश का कारण बनती है। नरक का द्वार खोल देती है।

समणी डॉ. सुगमनिधि ने कहा कि आत्मा में ज्ञान का धागा पिरो देते है, तो आत्मा संसार में भटकती नहीं है। ज्ञान और क्रिया दोनों अनिवार्य हैं। ज्ञान मनुष्य का सबसे मूल्यवान धन है। यह वह प्रकाश है, जो अज्ञानता के अंधकार को दूर करता है। ज्ञान से ही व्यक्ति सही और गलत में अंतर करना सीखता है और अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाता है। जब मनुष्य ज्ञान प्राप्त करता है, तो उसका मन विस्तृत होता है, सोच में गहराई आती है और समाज के प्रति उसका दृष्टिकोण सकारात्मक बनता है। केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं, अनुभव और व्यवहारिक ज्ञान भी उतना ही आवश्यक है। ज्ञान प्राप्त करने में, दान देने में, तप करने में इन तीन चीज में हमेशा तत्पर रहना चाहिए। संचालन संजय पींचा ने किया।

सामूहिक दया मंगलवार को

प्रवचन में पूछे गए प्रश्नों के‌ सही उत्तर‌ प्रियंका पारख व सुनील ललवाणी‌ ने दिए। इन्हें सुरेशचंद, महेश कुमार कोठारी परिवार चेन्नई वालों के सौजन्य से रजत मेडल देकर सम्मानित किया गया। प्रवचन की प्रभावना‌ का लाभ‌ आनंदी देवी, जसराज सुराणा परिवार ने लिया। दोपहर 2 से 4 बजे तक सुशील धरम आराधना भवन में आध्यात्मिक ज्ञान-ध्यान संस्कार शिविर का आयोजन हुआ। इस दौरान शिवरार्थीयो‌ को सम्मानित भी किया गया। रविवार को कुचेरा से पदम सुराणा, बालाघाट से निलेश बोथरा, संजीव चंडालिया सपरिवार समणी वृंद के दर्शन करने आए। संघ मंत्री हरकचंद ललवानी ने बताया कि मंगलवार को डॉ. पदमचंद्र महाराज के जन्मदिवस के‌ उपलक्ष्य में सामूहिक दया का‌ आयोजन होगा। धर्मसभा में नरपतचंद ललवाणी‌, पारस भूरट, अशोक नाहटा, पूनमचंद बैद, मनोज ललवाणी‌, जितेंद्र चौरड़िया, पुष्पा ललवाणी‌, विनिता पींचा, सपना ललवाणी‌, मनीषा सुराणा, बिरजा बाई ललवाणी‌ आदि श्रद्धालु मौजूद थे।