



संस्कारों की शिक्षा आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता: विधायक जेठानंद व्यास
बीकानेर // सरला देवी पुरोहित (माँ) चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में पुरुषोत्तम मास के पावन उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का शनिवार को भव्य और धूमधाम से समापन हो गया। गोपेश्वर बस्ती स्थित श्री गोपेश्वर विद्यापीठ के पास आयोजित इस कथा के अंतिम दिन पूर्णाहुति के अवसर पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा के मुख्य प्रसंगों की व्याख्या करते हुए सुप्रसिद्ध एवं प्रकांड भागवतविद् पं. विजेंद्र व्यास ने जब भगवान श्री कृष्ण और उनके अनन्य मित्र सुदामा के चरित्र का वर्णन किया, तो पंडाल में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं और पूरा माहौल भावुक हो उठा। कथा व्यास ने बहुत ही सरल और मार्मिक शब्दों में राजा परीक्षित की मोक्ष-मुक्ति की कथा की विवेचना की, जिसे भक्तों ने एकटक होकर सुना। इसके साथ ही उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के 16,108 कन्याओं से विवाह के प्रसंग का रसपूर्ण व प्रभावी वर्णन किया और कलयुग के प्रभाव से जुड़े प्रसंगों पर भी प्रकाश डाला। कथा के समापन पर व्यास जी ने आयोजक ट्रस्ट, बनावत पुरोहित परिवार, सभी कार्यकर्ताओं और सहयोगियों का आभार प्रकट किया।
बच्चों की दिनचर्या पर नजर रखें अभिभावक: जेठानंद व्यास
कथा के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बीकानेर पश्चिम के विधायक जेठानंद व्यास उपस्थित रहे। अपने संबोधन में संस्कारों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक समय में नई पीढ़ी को संस्कार देना सबसे बड़ी आवश्यकता है। सभी अभिभावकों को अपने बच्चों की दिनचर्या के संबंध में पूरी जानकारी रखनी चाहिए।”उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे दिव्य आयोजनों से समाज में अधर्म का नाश होता है और धर्म की विजय होती है। आयोजक ट्रस्ट की ओर से महेश कुमार, योगेश कुमार, शिवकुमार रंगा और कालू सिंह राजपुरोहित सहित अन्य गणमान्य जनों ने मुख्य अतिथि विधायक जेठानंद व्यास का माला पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर और मोमेंटो (स्मृति चिह्न) भेंट कर भव्य स्वागत व अभिनंदन किया।



