गूंज रही किलकारी, मिल रहा स्वास्थ्य संदेश

स्वास्थ्य

आशाएं भी हो रहीं डिजिटल प्रशिक्षण से सशक्त

नागौर // अब गर्भवती और प्रसूता महिलाओं को गर्भकाल और प्रसव के बाद की देखभाल के लिए न तो किताबें पलटने की जरूरत है और न ही इंटरनेट खंगालने की। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने ‘किलकारी सेवा’ के जरिए उनकी जेब में मौजूद मोबाइल फोन को ही मार्गदर्शक बना दिया है। इस सेवा से महिलाओं को हर सप्ताह स्वास्थ्य संबंधी वॉयस मैसेज मिल रहे हैं, वहीं ‘मोबाइल एकेडमी’ के जरिये आशा सहयोगिनियों को विशेष डिजिटल प्रशिक्षण देकर उनकी कार्यकुशलता भी बढ़ाई जा रही है।

सीएमएचओ डॉ. जुगल किशोर सैनी ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की पहल पर शुरू हुई यह किलकारी सेवा जिले की हजारों महिलाओं को लाभान्वित कर रही है। पीसीटीएस सॉफ्टवेयर पर पंजीकृत महिलाओं को गर्भावस्था के चौथे माह से लेकर शिशु के एक वर्ष का होने तक कुल 72 वॉयस मैसेज भेजे जाते हैं। इनमें प्रसव पूर्व देखभाल, प्रसवोत्तर स्वास्थ्य, एएनसी, एचबीएनसी, परिवार नियोजन और बच्चों के पूर्ण टीकाकरण जैसी अहम जानकारियां शामिल होती हैं।

इसी तरह, मोबाइल एकेडमी कार्यक्रम आशा सहयोगिनियों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है। डिजिटल इंडिया मिशन के अंतर्गत चल रहे इस कार्यक्रम के तहत 240 मिनट का ऑडियो कोर्स तैयार किया गया है, जिसमें 11 अध्याय और 44 पाठ हैं। आशाएं अपने पंजीकृत नंबर से 14424 डायल कर कभी भी यह कोर्स कर सकती हैं। कोर्स पूरा करने पर भारत सरकार की ओर से प्रमाण-पत्र भी दिया जाता है। नागौर जिले की अब तक 896 आशा सहयोगिनियां यह कोर्स सफलतापूर्वक कर चुकी हैं।

कार्यक्रम अधिकारी नवलकिशोर व्यास ने बुधवार को आशा सहयोगिनियों के साथ जिला टी. बी. निवारण केंद्र के सभागार में, राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ताऊसर, राजकीय शहरी प्राथमिक शास्त्र केंद्र दवे नगर एवं लोहरपुरा में बैठक कर इन दोनों योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आशा सहयोगिनी गांव स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की सबसे मजबूत कड़ी हैं। मोबाइल एकेडमी उनके ज्ञान और संचार कौशल को मजबूत कर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बना रही है। बैठक को जिला कार्यक्रम समन्वयक आईईसी हेमंत उज्जवल, जिला आशा समन्वयक अनीता चौधरी, ब्लाक कार्यक्रम अधिकारी दिनेश सेवग, ब्लॉक आशा समन्वयक प्रमिला चारण ने भी संबोधित किया।