



नागौर में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा लिए जा रहे सैम्पल
नागौर // फल-सब्जियों को कृत्रिम रूप से पकाने एवं संरक्षण के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अनसेफ एवं नॉन परमिटेड रसायनों को लेकर चिकित्सा विभाग ने इस बार सख्ती दिखाई है। स्वच्छ फल-सब्जी की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए चिकित्सा विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जुगल किशोर सैनी ने बताया कि इस अभियान के तहत 30 मई तक फलों एवं सब्जियों के संरक्षण व कृत्रिम पकाव के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अनसेफ रसायनों की जांच की जाएगी। इसके लिए गोदामों एवं दुकानों से फलों एवं सब्जियों के सैंपल लेकर लैबोरेट्री में जांच के लिए भिजवाए जाएंगे।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सैनी ने बताया कि राजस्थान के खाद्य सुरक्षा आयुक्त टी गुइटे के निर्देशानुसार संचालित इस अभियान के तहत जिले में खा़द्य सुरक्षा अधिकारी गणपतराम जाट व संदीप अग्रवाल को टीम सहित फल सब्जी मंडी के अतिरिक्त बड़े रिटेलर सब्जी विक्रेताओं के यहां से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इन्हीं निर्देशों के चलते जिला मुख्यालय नागौर की फल एवं सब्जी मंडी के अतिरिक्त बाजार में फल-सब्जी के बड़े रिटेलरों के यहां से आम, तरबूज, केला, सेव, मौसमी पपीता अंगूर आदि फलों के सैम्पल लिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 18 मई से शुरू किए गए अभियान के तहत अब तक कुल 26 फल- सब्जी विक्रेताओं के यहां से सैम्पल लिए गए। मंगलवार को सुबह फल एवं सब्जी मंडी से 8 सैंपल लिए गए. उन्होंने बताया कि सोमवार को आम तरबूज व पपीता व मौसमी के सैंपल लिए गए.
जांच टीम में संतोष जोशी व चैनाराम शामिल रहे।
गोंद एवं वैक्स कोटिंग में खतरनाक कैमिकल सीएमएचओ डॉ. जुगल किशोर सैनी ने बताया कि फूड सेफ्टी स्टेंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने स्टिकर लगे फल को सेहत के लिए खतरनाक माना है, क्योंकि स्टिकर की गोंद में खतरनाक कैमिकल मौजूद होते हैं। फल पर वैक्स की कोटिंग (मोम) भी सेहत के लिए खतरनाक है। सेब पर वैक्स की कोटिंग से चमक आ जाती है। इसके बाद व्यापारी सेब पर ब्रांड का स्टिकर लगाकर महंगे दामों पर बेचते हैं। बाजार में दो प्रकार के वैक्स आते है।
यूं करे उपयोग
वैक्स कोटिंग वाले या रसायन में डूबोए फलों को अगर सही तरीके से ना धोया जाए और इसे सीधे खाते रहे तो कैंसर जैसी बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। इससे बचाव के लिए एक बर्तन में गुनगुना पानी लेकर उसमें बेकिंग पाउडर मिलाएं, फिर उस घोल में सेब या अंगूर को डालें। इससे सारे पेस्टीसाइड और कैमिकल निकल जाएंगे।
बच्चों, बुजुर्गों व गर्भवतियों को हानि
कैल्शियम कार्बाइड आमतौर पर फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होता है। इसका इस्तेमाल आम, केला, चीकू, पपीता, तरबूज, खरबूजा सहित अन्य फलों को जल्दी पकाने के लिए भी करते हैं। ऐसे फल बाहर से पके हुए लगते हैं, लेकिन स्वादिष्ट नहीं होते। भारत सरकार ने फलों को पकाने में कैल्शियम कार्बाइड के इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है। इससे फलों में नेचुरल मिठास और पोषण की मात्रा कम होती है।
हैं। इसमें एक प्रतिबंधित है, जिसका नाम पैराफिन वैक्स है। इसके खाने से कैंसर, लिवर और किडनी बीमारी हो सकती है। अंगूर को लंबे समय तक खराब होने से बचाने के लिए इसे कैमिकल से भरे टब में डूबोया जाता हैं। इससे अंगूर लंबे समय तक ताजा रहते हैं। इससे अंगूरों में कीड़े नहीं लगते और वे सड़ते नहीं है। साथ ही यह पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं। लंबे समय तक इन्हें खाने से कैंसर, मुंह में छाले, तंत्रिका संबंधी समस्याएं, गैस, एसिडिटी और लिवर डिसऑर्डर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह ज्यादा खतरनाक है। इसी तरह तरबूज को लाल दिखाने के लिए उसमें सिरींज के जरिए लाल रंग डाला जाता है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।
यहां की जा सकती है शिकायत
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि मिलावट आदि के संदेहास्पद मामलो की सूचना देने के लिए चिकित्सा विभाग ने नम्बर जारी कर रखे हैं। जिला कंट्रोल रूम 01582-240844 पर कोई भी आमजन सूचना दे सकता है। सत्यापन के बाद विभागीय टीम निरीक्षण कर सैंपल आदि की कार्यवाही करेगी।




