मूल्‍यों और सिद्धांतों पर टिके रहना ही पत्रकारिता के संकटों का समाधान : राजीव हर्ष

समाज

प्रख्यात लोककला मर्मज्ञ डॉ.श्रीलाल मोहता की पुण्यतिथि पर पत्रकारिता के संकट विषय पर हुआ परिसंवाद का आयोजन

बीकानेर // मूल्‍य और सिद्धांत पत्रकारिता के आधार होते हैं जब पत्रकार या पत्रकारिता से जुड़े संस्‍थान बाजारवाद और राजनीतिवाद के चलते मूल्‍यों और सिद्धांतों के साथ समझौता करने लगते हैं तो पत्रकारिता पर संकट छाने लगता है। पत्रकार और पत्रकारिता संस्‍थानों का अपने मूल्‍यों और सिद्धांतों पर टिक रहना ही पत्रकारिता के संकटों का समाधान हैं। ये उद्बोधन वरिष्ठ पत्रकार राजीव हर्ष ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन के तहत स्थानीय आनंद निकेतन में व्यक्त किए।

अवसर था – प्रख्यात लोककला मर्मज्ञ डॉ.श्रीलाल मोहता की पुण्यतिथि 16 मई पर आयोजित कला-सृजनमाला के तहत पत्रकारिता के संकट विषय पर परिसंवाद का। उल्लेखनीय है कि बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति, परंपरा, बीकानेर, प्रज्ञा परिवृत और उरमूल सीमांत समिति, बज्जू के सह-आयोजन में कीर्तिशेष डॉ.श्रीलाल मोहता की पुण्यतिथि पर प्रतिवर्ष 16 मई को कलासृजनमाला के तहत साहित्य, कला और सांस्कृतिक उन्नयन के आयोजन किए जाते हैं।

अध्यक्षीय उद्बोधन में राजीव हर्ष ने कहा कि पत्रकारों व पत्रकारिता संस्‍थानों द्वारा अपनी महत्‍वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए शॉर्टकट अपनाया जाना एक बड़ा संकट है इससें पत्रकारिता निष्‍पक्ष नहीं रह जाती। इनके अलावा प्रायोजित समाचारों का छपना और पत्रकारों का आर्थिक रूप से स्वावलंबी न होना भी बड़ा संकट है।

सान्निध्य उद्बोधन में बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति के अध्यक्ष डॉ. ओम कुवेरा ने कहा कि पत्रकारिता को मिशन के रूप में ही लेना चाहिए इसे व्यवसाय व पेशा नहीं बनाना चाहिए।
विषय प्रवर्तन के दौरान प्रो.ब्रजरतन जोशी ने कहा कि पत्रकारिता पर द्विमुखी और द्वंद्वात्मक संकट हैं। तथ्यों पर भावनाएं और बाजारवाद अधिक प्रभावी बनते जा रहे हैं। वैश्विक सर्वेक्षणों में यह सामने आया है कि मीडिया की विश्वसनीयता घटती जा रही है। इसलिए हमें लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर गहराए संकट पर सार्थक विचार करना चाहिए।

खुले सत्र में इन्होंने रखे विचार

खुले सत्र में शहर के प्रमुख पत्रकारों एवं सृजनकर्मियों ने परिसंवाद में अपने विचार रखें। जिनमें वरिष्ठ पत्रकार मधु आचार्य ने कहा कि आज की पत्रकारिता सत्य का अन्वेषण की जगह सत्य का बाजार बन गई है। पत्रकार अजय जोशी ने कहा कि सोशल मीडिया अपनी भ्रामक खबरों से पत्रकारिता के लिए संकट के रूप में सामने आ रहा है। चिंतक दीपचंद सांखला ने कहा कि अब पत्रकारिता तो देखने को ही नहीं मिलती। आज के पत्रकार मीडिया क्लर्क बनते जा रहे हैं, सांखला ने पत्रकारिता में आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस के बढ़ते चलन पर चिंता जाहिर की। पत्रकार अनुराग हर्ष ने कहा कि खबर का मूल्य बौद्धिक स्तर की जगह आर्थिक स्तर पर आंका जाने लगा है। लेखक राजेन्द्र जोशी ने कहा कि पत्रकारिता पर कोई संकट नहीं है। आज के दौर में हर कोई पत्रकार बन सकता है। पत्रकार सुमित शर्मा ने समाचार संकलन के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा के मुद्दे को उठाया। आनन्द आचार्य ने कहा कि पत्रकारिता में आधुनिक तकनीकी संसाधनों के प्रति उदासीनता व्याप्त है। पत्रकार श्याममारू ने कहा कि आज खबर के प्रभाव के प्रति कोई गंभीर नहीं है। पत्रकार श्याम नारायण रंगा ने पेडन्यूज के चलन की आलोचना की। आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस के बढ़ते चलन को गंभीर बताया उन्‍होंने कहा कि आज सोशल मीडिया में आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस का इस्‍तेमाल कर इतिहास को विकृत करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में नमामीशंकर, राजा सांखी, अशोक कुमार आदि ने भी अपने विचार अभिव्यक्त किए।

सुधि-श्रोताओं एवं प्रबुद्ध महानुभाव की सक्रिय उपस्थिति और परिसंवाद में विचाराभिव्यक्ति ने आयोजन को सार्थकता प्रदान की। आयोजन की सफलता में संस्था के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता ने भी प्रमुख भूमिका निभाई। संचालन ओम प्रकाश सुथार ने किया और अंत में आगंतुकों के प्रति आभार संस्था परिवार के मुकेश व्यास ने व्यक्त किया।