कोटगेट अंडरब्रिज और सांखला फाटक योजना पर उठे सवाल

प्रशासन

पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने मुख्यमंत्री को भेजे सुझाव, दोतरफा अंडरब्रिज बनाने की मांग

बीकानेर // पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने कोटगेट रेलवे फाटक पर प्रस्तावित अंडरब्रिज एवं सांखला फाटक योजना को लेकर राज्य सरकार और रेलवे प्रशासन को महत्वपूर्ण सुझाव भेजे हैं।

उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी तथा केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सहित रेलवे अधिकारियों को भेजे अपने ज्ञापन में बताया है कि वर्तमान प्रस्ताव के अनुसार कोटगेट रेलवे फाटक पर मात्र चार मीटर चौड़ा एकतरफा अंडरब्रिज बनाया जा रहा है, जबकि रेलवे फाटक पूर्व की भांति रेल आने पर बंद रहेगा। इससे शहर की यातायात समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाएगा।

डॉ. कल्ला ने बताया कि बीकानेर शहर के रेलवे फाटक दिन में लगभग 52 बार बंद होते हैं। ऐसे में यदि अंडरब्रिज एकतरफा बनाया गया तो लोगों को दूसरी दिशा में अब भी फाटक पर रुकना पड़ेगा और आमजन को अपेक्षित राहत नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि डीआरएम नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे, बीकानेर ने भी माना है कि दोनों तरफ आवागमन वाला अंडरब्रिज बनने पर ही कोटगेट फाटक की समस्या का स्थायी समाधान संभव होगा।

उन्होंने कहा कि देश में कहीं भी ऐसा उदाहरण नहीं है जहां रेलवे फाटक भी बना रहे और साथ में एकतरफा अंडरब्रिज हो। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए दोतरफा अंडरब्रिज ही व्यावहारिक और जनहितकारी विकल्प है।

पूर्व मंत्री ने सांखला फाटक को स्थायी रूप से बंद कर दीवार बनाने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इससे पैदल चलने वाले, साइकिल एवं मोटरसाइकिल सवार लोगों को फड़ बाजार सहित आसपास के क्षेत्रों में पहुंचने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा। प्रस्तावित अंडरब्रिज स्टेशन रोड मटका गली होते हुए बिन्नाणी बिल्डिंग के पास निकलेगा, जिससे आमजन को भारी असुविधा होगी।

डॉ. कल्ला ने सुझाव दिया कि अंडरब्रिज में जलभराव रोकने के लिए भूमिगत ड्रेनेज व्यवस्था अथवा भूमिगत जल निकासी संरचना विकसित की जानी चाहिए। साथ ही सांखला फाटक पर किसी भी प्रकार की दीवार नहीं बनाई जानी चाहिए ताकि पैदल और दोपहिया वाहनों का आवागमन सुचारू बना रहे।

उन्होंने बीकानेर-लालगढ़ रेलवे लाइन के दोहरीकरण और विद्युतीकरण योजना पर भी सुझाव देते हुए कहा कि वर्तमान योजना में रेलवे को भूमि अधिग्रहण के कारण लगभग 200 से 250 करोड़ रुपए अतिरिक्त मुआवजा देना पड़ सकता है और कानूनी विवाद भी उत्पन्न हो सकते हैं।

डॉ. कल्ला ने वैकल्पिक सुझाव देते हुए कहा कि लालगढ़ से नाल रेलवे स्टेशन तक पहले से बड़ी रेल लाइन उपलब्ध है। नाल स्टेशन को उदयरामसर होते हुए बीकानेर कैंट के नए रेलवे स्टेशन से जोड़ दिया जाए तो बिना विवाद के दोहरी लाइन शीघ्रता से पहुंचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस कार्य का सर्वे और प्रारंभिक भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूर्व में की जा चुकी है। इससे बीकानेर जैसे सीमावर्ती क्षेत्र को रेलवे के दो वैकल्पिक मार्ग मिलेंगे, जो सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होंगे तथा रेलवे का खर्च भी कम होगा।

पूर्व मंत्री ने राज्य सरकार और रेलवे प्रशासन से जनहित में इन सुझावों पर गंभीरता से विचार कर बीकानेर की जनता को रेलवे फाटकों से होने वाली परेशानियों से राहत दिलाने की मांग की है।