


नारी शक्ति संगठन की संगोष्ठी में बोलीं महिलाएं- “पुरुष साथी बने, मालिक नहीं”; समय प्रबंधन, आत्मसम्मान और महिला योगदान पर खुलकर हुई चर्चा
बीकानेर // घर की जिम्मेदारियों से लेकर कार्यस्थल तक महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत हुई है, लेकिन चुनौतियां आज भी कम नहीं हुई हैं। कामकाजी महिलाएं ऑफिस से लौटने के बाद भी चूल्हा-चौका, बच्चों की देखभाल और परिवार की जिम्मेदारियां निभाती हैं। इसके बावजूद समाज में उन्हें बराबरी और सम्मान के लिए संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे ही विचार रविवार को जिला उद्योग संघ सभागार में आयोजित नारी शक्ति संगठन की संगोष्ठी में गूंजे।


“नारी घर की धुरी एवं महिलाओं का समय प्रबंधन” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में महिलाओं ने खुलकर अपने विचार रखे और सामाजिक सोच, पारिवारिक जिम्मेदारियों तथा महिला आत्मसम्मान जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए नारी शक्ति संगठन की अध्यक्ष मधु खत्री ने आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य महिलाओं के अनुभवों और संघर्षों को साझा करने के साथ संवाद की संस्कृति को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन उनके सामने समय प्रबंधन और मानसिक दबाव जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं।

संगोष्ठी में महिला वक्ताओं ने कहा कि नारी को सदियों से घर की धुरी माना गया, लेकिन उसी पर नैतिकता और संस्कारों का पूरा बोझ डाल दिया गया। अब समय बदल चुका है और महिला केवल घर तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज और देश की धुरी बन चुकी है। वक्ताओं ने कहा कि महिलाएं शिक्षा, व्यापार, प्रशासन, चिकित्सा और उद्योग सहित हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।
डॉ. नीलम भार्गव ने कहा कि महिलाएं यदि स्वयं को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत रखेंगी तभी परिवार और समाज को बेहतर दिशा दे पाएंगी। उन्होंने महिलाओं को समय प्रबन्धन अपनाने की सलाह दी।
डॉ. गरिमा खत्री ने कहा कि महिलाओं को सबसे पहले स्वयं के लिए समय निकालना सीखना होगा। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास और आत्मसम्मान ही महिला की सबसे बड़ी ताकत है।
शशि वर्मा ने ईश्वर ने स्त्री और पुरुष की रचना की। दोनों रचनाएं श्रेष्ठ है मगर इस सृष्टि का विस्तार करने के लिए स्त्री को जननी बनाया और उसमें त्याग, दया, प्रेम व समर्पण की भावना ज्यादा विकसित की। इसका पुरुषों ने फायदा उठाया । उन्होंने कहा कि समाज में आज भी महिलाओं से त्याग की अपेक्षा की जाती है, लेकिन अब महिलाओं को अपनी पहचान और अधिकारों के प्रति सजग होना होगा।
सुनीता गुर्जर ने कहा कि बीकानेर के पापड़, भुजिया, मूंग बड़ी और अन्य खाद्य उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने में महिलाओं का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि घरेलू महिलाओं के श्रम को कभी उचित सम्मान नहीं मिला। हमे टाइम को मैनेज कर योग अपनाना चाहिए।
संजू खत्री ने कहा कि महिलाएं प्रेम और परिवार के लिए अपने सपनों से समझौता कर लेती हैं, लेकिन अब नई पीढ़ी की महिलाएं अपनी पहचान बनाना चाहती हैं।
अनसूया खत्री ने कहा कि ईश्वर ने स्त्री और पुरुष दोनों को समान बनाया है। महिलाओं में दया, ममता और त्याग की भावना स्वाभाविक रूप से होती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वे कमजोर हैं।
मल्लिका सप्रा ने कहा कि महिलाओं को अब अपने निर्णय स्वयं लेने चाहिए और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहिए। हमे जिम्मेदार बनाया मगर हम अपने घर के पुरुष को जिम्मेदार नही बना पाए। हमे बेटो को भी घर के काम सिखाने चाहिए ये केवल स्त्री के काम नही है बल्कि पुरुषों की भी इसमें जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
कविता आर्य ने कहा कि समय प्रबंधन ही महिलाओं की सबसे बड़ी कला है। एक महिला घर, परिवार और करियर को जिस संतुलन से संभालती है, वह अपने आप में प्रेरणादायक है।
गरिमा विजय ने कहा कि महिलाओं को परिवार में सम्मान और सहयोग का वातावरण मिलना चाहिए। उन्होंने उदाहरण दिया कि मेरे पिता हमेशा मेरा सहयोग करते रहते हैं।
संगोष्ठी में महिलाओं ने कहा कि यदि महिलाएं स्वस्थ और ऊर्जावान रहेंगी तभी वे परिवार और समाज को बेहतर दिशा दे पाएंगी। इसके लिए नियमित दिनचर्या, योग, सकारात्मक सोच और आत्मसम्मान बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान महिला वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक समय में महिलाओं की भूमिका केवल घर तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास की मुख्य भागीदार बन चुकी हैं।
अंत मे उदघोषक ज्योति प्रकाश रंगा ने आयोजन की व्याख्या की तथा इसे सारगर्भित संगोष्ठी बताया। कार्यक्रम में नारी शक्ति संगठन की ओर से जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष समाज सेवी डीपी पचीसिया या का आभार व्यापित करते हुए उनका सम्मान भी किया गया।
ये रहे मौजूद
इस संगोष्ठी में रेखा गुप्ता, राजकुमारी व्यास, डॉ विजय लक्ष्मी व्यास, सारिका बिस्सा, लक्ष्मी मोदी, सुषमा राय, शैली दुग्गल, रजनी कालरा, ममता मेहंदीरता, वर्षा मोहता, बबीता जाजू सहित अनेक महिलाएं मौजूद रही।



