




राष्ट्रीय संत श्री सरजूदास जी महाराज बोले— भगवान शिव की आराधना से मिलती है सुख, शांति और लोककल्याण की ऊर्जा
बीकानेर। गंगाशहर के सुजानदेसर स्थित रामझरोखा कैलाशधाम में पूरे श्रावण माह से चल रहे रुद्राभिषेक महोत्सव का समापन पूर्णिमा पर यज्ञ पूर्णाहुति के साथ श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में हुआ। विश्व कल्याण की भावना से आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव का अभिषेक एवं पूजन किया।

राष्ट्रीय संत एवं रामझरोखा कैलाशधाम के पीठाधीश्वर श्री सरजूदास जी महाराज ने बताया कि परम पूज्य गुरुदेव सियारामजी महाराज की कृपा और पूज्य श्री रामदास जी महाराज के आशीर्वाद से पूरे श्रावण माह प्रतिदिन भगवान शिव का जल, दूध, दही, घी, पंचामृत, शहद, बेलपत्र एवं विभिन्न औषधियों से विधि-विधानपूर्वक रुद्राभिषेक किया गया। प्रत्येक सोमवार को सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शिव आराधना में सहभागिता निभाई।
अनुष्ठान के समापन अवसर पर पंडित सुरेश महाराज के सान्निध्य में यजमान उत्तम भाटी एवं उनकी धर्मपत्नी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं। इस अवसर पर श्री सरजूदास जी महाराज ने शिव महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर सृष्टि की रक्षा की थी, तभी से वे नीलकंठ कहलाए। उन्होंने बताया कि विष की उष्णता को शांत करने के लिए देवी-देवताओं ने भगवान शिव पर गंगाजल अर्पित किया था, जिसके बाद से शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा प्रचलित हुई।
उन्होंने कहा कि सावन मास भगवान शिव की विशेष आराधना का पर्व है। इस माह श्रद्धा और भक्ति से किया गया रुद्राभिषेक जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है।



