



“सत्यव्रत सामवेदी की पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि समारोह | महंत दीपक वल्लभ गोस्वामी ने शिक्षाविदों और फेकल्टी सदस्यों को दिया कर्म, विवेक और आत्मानुशासन का संदेश”
जयपुर // शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता और श्रेष्ठ जीवन-दृष्टि का विकास भी है। इसी विचार के साथ वैदिक कन्या पीजी महाविद्यालय, राजा पार्क में वैदिक शिक्षण संस्थानों के संस्थापक स्वर्गीय सत्यव्रत सामवेदी की पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि समारोह आयोजित किया गया। शिक्षाविदों एवं फैकल्टी सदस्यों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया। इस दौरान श्रीमद्भगवद्गीता के जीवन-दर्शन और वैदिक मूल्यों के माध्यम से व्यक्तित्व विकास पर विचार रखे गए।
गीता से सीखें कर्म और संतुलन का सूत्र: महंत गोस्वामी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महंत श्री दीपक वल्लभ गोस्वामी ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता जीवन की चुनौतियों का सामना करने, कर्तव्य के प्रति समर्पित रहने और विपरीत परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है। इसका संदेश केवल आध्यात्मिक जीवन तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा, कार्यक्षेत्र और सामाजिक जिम्मेदारियों में भी प्रासंगिक है।
उन्होंने गीता के श्लोक ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति को परिणाम की चिंता में उलझने के बजाय अपने प्रयासों की गुणवत्ता और कर्तव्यनिष्ठा पर ध्यान देना चाहिए। यही दृष्टिकोण आत्मविश्वास बढ़ाने और तनाव से निपटने में सहायक है।
महंत गोस्वामी ने कहा कि व्यक्तित्व विकास का अर्थ केवल प्रभावशाली बोलना या बाहरी व्यक्तित्व को आकर्षक बनाना नहीं है। विचारों की शुद्धता, व्यवहार में विनम्रता, निर्णयों में विवेक और जिम्मेदारियों के प्रति प्रतिबद्धता इसके वास्तविक आधार हैं। शिक्षक इन गुणों को विद्यार्थियों के जीवन में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ज्ञान के साथ नैतिकता, अनुशासन और संवेदनशीलता का समावेश विद्यार्थियों को सफल पेशेवर के साथ जिम्मेदार नागरिक भी बनाता है। महंत गोस्वामी ने कहा कि वास्तविक सफलता वही है, जिसमें उपलब्धियों के साथ आचरण की श्रेष्ठता भी बनी रहे। धैर्य, करुणा, ईमानदारी और आत्मानुशासन जैसे गुण व्यक्ति को प्रतिस्पर्धा के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
उन्होंने आधुनिक शिक्षा और वैदिक ज्ञान को परस्पर पूरक बताते हुए कहा कि वैज्ञानिक सोच, तकनीकी कौशल और व्यावहारिक ज्ञान के साथ नैतिक चेतना का समन्वय शिक्षा को अधिक प्रभावी एवं समाजोपयोगी बना सकता है।
‘SHRIJAN’ कॉन्फ्रेंस के पोस्टर का विमोचन
समारोह में वैदिक कन्या पीजी महाविद्यालय एवं श्रीपदमिनी इनोवेशन्स प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाली ‘SHRIJAN – The International Conference’ के पोस्टर का विमोचन किया गया। अंतरराष्ट्रीय वेलनेस कॉन्फ्रेंस 26 एवं 27 अक्टूबर 2026 को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर RIC जयपुर में होगी।
“The Pursuit of Well-Being in the 21st Century – Challenges /Choices /Possibilities” थीम पर आधारित इस कॉन्फ्रेंस में मानसिक स्वास्थ्य, समग्र विकास, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर विमर्श होगा। इसमें शिक्षाविदों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, विद्यार्थियों, अभिभावकों, पेशेवरों और सरकारी अधिकारियों की सहभागिता प्रस्तावित है।
शिक्षा और वेलनेस के समन्वय पर जोर
कार्यक्रम में महाविद्यालय के निदेशक पंकज जोशी, एसोसिएट डायरेक्टर कीर्ति जोशी, सचिव नंद किशोर सोनी, प्राचार्य डॉ. पूनम चोपड़ा, कॉन्फ्रेंस कोऑर्डिनेटर डॉ. नेहा खत्री, धर्मसेतु मैनेजमेंट के संस्थापक राघव जोशी, वैदिक बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की प्राचार्य डॉ. माधवी अग्रवाल, महर्षि दयानंद बी.एड. कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सुनीता भाटिया, डीएवी सेंट्रल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्राचार्य सीमा शर्मा, एडवोकेट जय शर्मा, प्रियंका भारद्वाज सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे।
समारोह ने सत्यव्रत सामवेदी की शैक्षिक विरासत को स्मरण करने के साथ शिक्षा में ज्ञान, नैतिकता और जीवन मूल्यों के समन्वय का संदेश दिया। वहीं, ‘SHRIJAN’ कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच समग्र स्वास्थ्य और बेहतर जीवन की संभावनाओं पर संवाद को आगे बढ़ाने की पहल की गई।



