भरण-पोषण का चेक बाउंस होने पर पति के खिलाफ FIR के आदेश

प्रशासन

हस्ताक्षर मिसमैच होने से नहीं मिल सके 33 हजार रुपए, कोर्ट ने 55 दिन की सजा भुगतने के लिए दोबारा गिरफ्तारी वारंट जारी करने के दिए निर्देश

बीकानेर // पारिवारिक न्यायालय संख्या-1 के पीठासीन अधिकारी डॉ. सतपाल वर्मा ने भरण-पोषण राशि के भुगतान के लिए दिए गए चेक के हस्ताक्षर बैंक में दर्ज हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाने पर पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने 15 अक्टूबर को सदर थानाधिकारी को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर उसकी प्रति न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिए। साथ ही आरोपी पति को पूर्व में सुनाई गई 55 दिन के साधारण कारावास की सजा भुगतने के लिए दोबारा गिरफ्तारी वारंट से तलब करने के आदेश भी जारी किए।

यह था मामला

मामले के अनुसार पलाना निवासी पीड़िता ने अपने पति सुखराम के खिलाफ धारा 125 सीआरपीसी के तहत भरण-पोषण के लिए पारिवारिक न्यायालय संख्या-1 में प्रार्थना पत्र पेश किया था। न्यायालय ने उसे स्वीकार करते हुए पति को प्रतिमाह 6,500 रुपए अंतरिम भरण-पोषण राशि देने के आदेश दिए थे। पति द्वारा नियमित भुगतान नहीं करने और बकाया राशि नहीं चुकाने पर पीड़िता ने धारा 125(3) सीआरपीसी के तहत आवेदन पेश किया। इसके बाद भी राशि जमा नहीं कराने पर न्यायालय ने सुखराम को 55 दिन के साधारण कारावास की सजा सुनाते हुए केंद्रीय कारागृह बीकानेर भेज दिया।

इसके बाद सुखराम ने अपने न्यायमित्र के माध्यम से भरण-पोषण की बकाया राशि अदा करने के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र पेश किया। इस पर उसे केंद्रीय कारागृह से न्यायालय में तलब किया गया। वहां सुखराम ने बकाया राशि के पेटे 33 हजार रुपए नकद और 33 हजार रुपए का एक चेक पीड़िता को दिया। चेक सौंपने का पूरा विवरण न्यायालय की अदाशिका में दर्ज किया गया।

पीड़िता ने चेक भुगतान के लिए अपने बैंक खाते में लगाया, लेकिन जारीकर्ता सुखराम के हस्ताक्षर बैंक में दर्ज हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाने के कारण चेक अनादरित हो गया। इससे पीड़िता को चेक के जरिए दी गई 33 हजार रुपए की राशि का भुगतान नहीं मिल सका। चेक देने के आधार पर न्यायालय ने सुखराम के प्रति नरम रुख अपनाते हुए उसी दिन उसकी 55 दिन के साधारण कारावास की सजा स्थगित कर रिहा कर दिया था।

बाद में पीड़िता के न्यायमित्र योगेंद्र कुमार पुरोहित और बाबूलाल स्वामी ने न्यायालय को चेक अनादरित होने की जानकारी दी। न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रथम दृष्टया माना कि सुखराम ने पीड़िता को भरण-पोषण राशि का भुगतान करने के बजाय छल करने के आशय से बैंक में दर्ज हस्ताक्षरों से भिन्न हस्ताक्षर किए। इस पर न्यायालय ने सदर थानाधिकारी को एफआईआर दर्ज करने और उसकी प्रति न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए। साथ ही सुखराम को पूर्व में सुनाई गई सजा भुगतने के लिए पुनः गिरफ्तारी वारंट से तलब करने के निर्देश जारी किए। पीड़िता की ओर से पैरवी एडवोकेट योगेंद्र कुमार पुरोहित और बाबूलाल स्वामी ने की।