



बीकानेर // आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपने बच्चों को संस्कार देना कहीं न कहीं भूलते जा रहे हैं, लेकिन अब चिंता की बात नहीं है। पं. बाबूलाल शास्त्री ज्योतिष बोध संस्थान द्वारा आयोजित नि:शुल्क रुद्राष्टाध्यायी (रुद्री) पाठ, शिव पूजा विधि, शिव महिम्न स्तोत्र, शिव तांडव स्तोत्र, रुद्राष्टकम् आदि के एक माह तक चलने वाले प्रशिक्षण शिविर को बच्चों के उज्ज्वल एवं संस्कारी भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

शिविर के शुभारंभ अवसर पर श्यामसुंदर जी महाराज ने कहा कि इन पवित्र अनुष्ठानों के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, आत्मसंयम, आध्यात्मिकता और वेदाध्ययन की भावना विकसित होती है। उन्होंने बच्चों से मोबाइल और कुसंगति से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि कुसंग हमारा समय, स्वास्थ्य, संबंध और सम्मान छीन लेता है, जिससे हम अपनी संस्कृति और परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे शिविर सनातन संस्कृति की दिव्य परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।
मुख्य अतिथि राजस्थान रियल एस्टेट अपीलेट ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश मदनगोपाल व्यास ने कहा कि इस प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से बच्चों को भक्ति, संस्कार और भारतीय परंपरा का अनमोल ज्ञान मिलेगा। उन्होंने कहा कि संध्या उपासना हमारे जीवन की जड़ है तथा संस्कृति को सुरक्षित रखना समय की आवश्यकता है। गीता और मंत्रों का वाचन सभी को आना चाहिए। ऐसे संस्कार शिविर मानव कल्याण के लिए पथप्रदर्शक बनेंगे।
बीकानेर जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष डी.पी. पच्चीसिया ने कहा कि ऐसे शिविर बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और उत्तम संस्कारों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं। ये शिविर न केवल आध्यात्मिक विकास करते हैं, बल्कि एकाग्रता और चरित्र निर्माण में भी सहायक हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पं. गोपाल नारायण व्यास ने कहा कि आज समाज पर भौतिकवाद हावी होता जा रहा है, लेकिन यदि हम आध्यात्मिकता से जुड़े रहेंगे तो अपनी संस्कृति से भी जुड़े रहेंगे। जब बच्चों को मंत्र और श्लोक सिखाए जाते हैं और वे समाज में उनका उच्चारण करते हैं, तो अपनी सभ्यता और संस्कृति से दूर हो चुके लोग भी पुन: जुड़ने लगते हैं।
शिविर संयोजक पं. राजेन्द्र किराडू ने बताया कि शिविर में रुद्री पाठ एवं अन्य वैदिक विधाओं का प्रशिक्षण पं. प्रहलाद व्यास द्वारा दिया जाएगा। शिविर प्रतिदिन सायं 6:45 बजे से 8:15 बजे तक आयोजित होगा, जिसमें रुद्री पाठ, शिव पूजा विधि तथा भगवान शिव के विभिन्न स्तोत्रों का अध्ययन करवाया जाएगा।
पं. मुरलीधर पुरोहित ने बताया कि प्रति वर्ष की भांति इस बार भी नि:शुल्क वेदाध्ययन करवाया जाएगा। विशेष बात यह है कि सायं 7:45 बजे से महिलाएं एवं बालिकाएं भी शिविर में भाग ले सकेंगी, जिन्हें शिव महिम्न स्तोत्र, पंचाक्षर स्तोत्र आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस अवसर पर पं. देवकीनंदन व्यास, राजकुमार पुरोहित, भवानीशंकर, सेठी किराडू, जुगल किशोर, पं. हिमांशु किराडू, पं. कवि किराडू, श्याम व्यास, वीरेन्द्र किराडू सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राजा सांखी ने किया।
पांच वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा शिविर
पं. हिमांशु किराडू ने बताया कि संस्थान पिछले पांच वर्षों से लगातार इस शिविर का आयोजन कर रहा है, जिसमें बच्चों एवं बालिकाओं को रुद्री पाठ, शिव पूजा विधि और भगवान शिव के विविध स्तोत्रों का वैदिक ज्ञान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिविर का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि सनातन धर्म की वैदिक परंपरा, संस्कार और आध्यात्मिक जीवनशैली को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। साथ ही बच्चों में प्राचीन विद्याओं के प्रति रुचि जागृत करना भी इस शिविर का मुख्य उद्देश्य है।



