एसपी ऑफिस के पोर्च की पटि्टयां चटकी, एक हिस्सा ढहाया, अब पीडब्ल्यूडी करा रही है मरम्मत

प्रशासन

महाराजा गंगासिंह के जमाने में हुआ था इस भव्य इमारत का निर्माण मगर देखरेख के अभाव में हो रही है जीर्ण-शीर्ण

बीकानेर // रियासतकाल के दौरान पब्लिक पार्क में बनी बीकानेर की सबसे भव्य इमारत कचहरी बिल्डिंग अब धीरे धीरे दरकने लगी है। इसके कई हिस्सों की पटि्टयां चटकने लगी है ऐसे में यहां जनहानि का खतरा बना हुआ है। बीते दिनों पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पोर्च की पटिट़्यां चटक गई। जैसे ही कलेक्टर कार्यालय में इसकी सूचना मिली तो प्रशासन हरकत में आ गया। बाद में पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं ने मौका देखा और चटकी पट्टियों को हटाने का काम शुरू किया। पुलिस अधीक्षक के चैंबर में जाने का रास्ता इसी पोर्च में से जाता है तथा यहीं पर पुलिस अधीक्षक का सरकारी वाहन खड़ा होता है मगर अब इस हिस्से को ढहा दिया गया है। पीडब्ल्यूडी ने पुरानी पटि्टयों को हटाकर अब यहां मरम्मत कार्य शुरू किया है। फिलहाल जनहानि तो टल गई मगर जर्जर हो रही इस भव्य इमारत की समय रहते सुध नहीं ली गई तो कभी भी यहां बड़ा हादसा हो सकता है। पीडब्ल्यूडी के सिटी एक्सईएन रमाकांत त्रिवेदी ने बताया कि फिलहाल एसपी ऑफिस के साइड वाले पोर्च की कुछ पटि्टयां हटाकर नई पट़टियां लगा रहे हैं। जल्द ही मरम्मत कार्य पूरा हो जाएगा।

पोर्च को मजबूत करना इसलिए जरूरी

दरअसल कलेक्टर कार्यालय पर जब भी राजनीतिक दल या सामाजिक दल यहां पर विरोध प्रदर्शन करते हैँ तो इसी पोर्च की छत पर आकर न केवल कलेक्टर कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी वरन मीडिया के तमाम फोटोग्राफर भी यहीं से विरोध प्रदर्शन के नजारे को शूट करते हैं। गनीमत रही कि पिछले दिनों में यहां कोई बड़ा आंदोलन नहीं हुआ अन्यथा उसी समय कोई जन हादसा घटित हो सकता था। बीते दिनों ही कलेक्टर कार्यालय के कार्मिकों को एसपी आफिस के ऊपर बने इस पोर्च की छत पर कुछ पटि्टयों में दरारें दिखी और उन्हें तुरंत कलेक्टर नम्रता वृष्णि को अवगत कराया। उन्होंने तत्काल पीडब्ल्यूडी के अभयिंताओं को सूचना दी और उन्होंने मौका देखकर इस हिस्से को गिराने में ही भलाई समझी। पीडब्ल्यूडी अभियंताओं की सूझबूझ से एकबारगी हादसा टल गया मगर इस 90 साल पुरानी बिल्डिंग के कई हिस्से अब भी बडी मरम्मत मांग रहे हैँ।

1934 में हुआ था इस भव्य इमारत का निर्माण

दरअसल महाराजा गंगासिंह के कार्यकाल में इस भव्य इमारत में स्टेट की कचहरी संचालित होती थी। जानकारों की मानें तो यहां 1887 में एक अपीलीय न्यायालय शुरू किया गया था। कालांतर में इसका निर्माण तेज गति से किया गया और फिर संभवत 1922 में यहां स्टेट कोर्ट की तर्ज पर हाईकोर्ट खोला गया। उसी दौरान इसका निर्माण शुरू हुआ। जानकार बताते हैं कि तराजू के आकार में बनी इस भव्य इमारत के निमार्ण 1922 से 1934 के मध्य पूरा हुआ। यह बिल्डिंग आज भी दूर से ही आकर्षण का केंद्र है। यहां आजादी के बाद जिला न्यायाालय संचालित होना शुरू हुआ। फिर धीरे धीरे यहां कलेक्टर कार्यालय व एसपी कार्यालय में संचालित होना शुरू हो गया। बीते कुछ साल पहले जिला एवं सत्र न्यायालय नए भवन में शिफ्ट हो गया मगर फिर भी कई कमरे आज भी बंद है और मरम्मत नहीं होने के कारण वे दिनों दिन जीर्ण शीर्ण हो रहे हैं। ऐसे में यहां हादसों की आशंका आज भी बरकरार है।