श्रद्धामय विश्वास बढ़ाकर सामाजिक सद्भाव जगाने पर दिया बल

समाज

आरएसएस का कार्यकर्ता विकास वर्ग प्रथम संपन्न

नागौर // जिला मुख्यालय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यकर्ता विकास वर्ग- प्रथम संपन्न हुआ। शारदा बाल निकेतन के खेल मैदान में आयोजित इस वर्ग का समापन समारोह का शुभारंभ सायं 6:15 बजे ध्वजारोहणम् रचना के साथ भगवा ध्वज का आरोहण कर किया गया। राजस्थान क्षेत्र के जयपुर, चित्तौड़ व जोधपुर प्रांत के स्वयंसेवकों की इस वर्ग में सहभागिता रही। समापन समारोह में अनंत श्री विभूषित अखिल भारतीय जगद्गुरु निंबाकाचार्य पीठाधीश्वर श्याम शरण देवाचार्यजी श्री जी महाराज, निंबार्क तीर्थ किशनगढ़ का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। यह कार्यक्रम गादीपति भोपाजी श्री वीर तेजाजी मंदिर खरनाल के दरियावराम धोलिया के मुख्य आतिथ्य तथा उद्योगपति एवं समाज सेवी नरसी राम कुलरिया के विशिष्ट आतिथ्य में हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र प्रचारक निंबाराम का मुख्य वक्ता के रूप में मार्गदर्शन मिला।

शारीरिक कार्यक्रम में सामूहिता, शक्ति व सतत साधना के दर्शन

सर्वप्रथम शारीरिक कार्यक्रम में सभी प्रशिणार्थी स्वयंसेवकों ने स्वयंसेवक शिक्षकों सहित ध्वज वंदना में घोष वादन की सुमधुर स्वर लहरियों के साथ ध्वज प्रदक्षिणा संचलन किया।
गण समता व अन्य शारीरिक कार्यक्रमों में घोषवादक स्वयंसेवकों द्वारा भारतीय रचना किरण, श्री राम, भूप, शिवरंजनी, मीरा, तैलंग, सोनभद्र, मेवाड़,अजय व चेतक का सुमधुर वादन किया। प्रशिक्षणार्थी स्वयंसेवकों ने पण्णव, आणक, झांझ, त्रिभुज, शंख, नागांग, तूर्य व वेणु आदि वाद्यों में विभिन्न रचनाओं का वादन किया। सर्वाधिकारी हनुमान सिंह देवड़ा ने वर्ग के सफल संचालन में प्रत्यक्ष व प्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले विविध संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं राजकीय उपक्रमों तथा नागौर के आत्मीय नागरिकों का हार्दिक आभार ज्ञापित किया वहीं वर्ग कार्यवाह रमेश चंद ने मंचस्थ अतिथियों का परिचय देते हुए वर्ग का प्रतिवेदन के माध्यम से जानकारी दी।

स।आज जाति में विभक्त न हो क्योकि हमारी संस्कृति वैभवशाली है

संत श्यामशरण देवाचार्य ने कहा कि करमा बाई व मीराबाई सनातन संस्कृति के गौरव है। हमारा समाज जाति पंथ में विभक्त न हो। सनातन संस्कृति के हम सभी अंग हैं। भगवान के लिए भक्ति महत्व है न कि जाति व वर्ण। मां सबरी व कुब्जा के उदाहरण से स्पष्ट है कि भगवान के लिए भक्ति ही महत्व है। हमारी सनातन संस्कृति वैभवशाली संस्कृति है। इससे हम अपना जीवन संयमित और संस्कारित बना सकते हैं।

हिंदू समाज के हित के लिए हमें श्रम साधना करनी है: निंबाराम

मुख्य वक्ता आरएसएस के राजस्थान क्षेत्र प्रचारक निंबाराम ने कहा कि संघ के कार्य के बारे में अनेक धारणाएं, विचार और मान्यताएं व भ्रम समाज जीवन में प्रचलित हैं। संघ का स्पष्ट मत, दिशा व दृष्टि स्पष्ट है कि स्वयंसेवकों को हिंदू समाज के हित और सुदृढ़ीकरण के लिए श्रम साधना करना है। हमारे देश का गौरवशाली इतिहास रहा है। महान संत परंपरा ने हमारी आध्यात्मिक धरोहर को संजोकर रखा है। विराट व भव्य महाकुंभ ने इस देश की सामाजिक समरसता और सनातन एकता का दिव्य रूप प्रकट किया। उन्होंने कहा कि समाज को सबल बनाने से ही राष्ट्र सशक्त बनेगा। हम कितनी भी व्यवस्थाएं क्यों ना खड़ी कर लें यदि समाज दुर्बल है तो राष्ट्र निर्माण में पिछड़ जाएंगे। संघ तो ईश्वरीय कार्य है। संघ विशुद्ध रूप से भारत को परम वैभव की ओर ले जाने के लिए सतत कार्यरत है।

पूज्य संत दरियाराम धौलिया का आशीर्वचन

अपने संबोधन में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दरियावराम धोलिया में कहा कि तेजाजी महाराज ने 930 वर्ष पूर्व समाज जीवन के सामने आदर्श प्रस्तुत किया। छुआछूत व भेदभाव को दूर कर एक समान व्यवहार करने पर बल दिया। संघ के शारीरिक कार्यक्रम व पथ संचलन को देखने से ऐसा अनुभव आया कि देश के सैनिकों के समान ही पथ संचलन व कार्यक्रम अनुशासित है। संघ का कार्य देशहित और हिंदुत्व के लिए परिश्रम करने का है। ऐसे श्रेष्ठ कार्यों के लिए साधुवाद।

नरसी राम कुलरिया का उद्वोधन

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि नरसीराम कुलरिया ने कहा कि संघ का कार्य व्यक्ति व समाज निर्माण से राष्ट्र निर्माण है जिससे विश्व कल्याण हो सके। संघ के स्थापना के 100 वें वर्ष में प्रवेश स्व के इच्छित भाव से राष्ट्र हेतु कार्य करना है। भारत को जीवंत जीवन अंतराष्ट्र के भाव से देखते व अनुभव करते हैं। मां व संतान के बीच का संबंध सम्मान व कर्तव्य के बोध जागरण का जागृत करता है ऐसा हम भारतवासी मानते हैं। संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की ओर परिणत करना है जो सर्वे भवंतु सुखिनः की कामना करते हैं। राष्ट्र है तभी हम सुरक्षित है इसलिए राष्ट्र सर्वोपरि है।