जल संरक्षण के लिए करोड़ों रूपए खर्च रही है सरकार मगर फूलनाथ तालाब में पानी की आवक रोकने में लगे हैं कुछ लोग

प्रशासन

बीकानेर विकास प्राधिकरण व जिला प्रशासन को बीकानेर सेवा योजना दे चुकी है ज्ञापन मगर नहीं हुआ एक्शन

बीकानेर // एक ओर सरकार जल संरक्षण को लेकर इन दिनों खूब प्रचार प्रसार कर रही है तथा बड़ा बजट भी खर्च किया जा रहा है मगर इसके बावजूद तालाबों में पानी के आवक वाले रास्तों से अतिक्रमण नहीं हटाए जा रहे हैं। ताजा मामला मूंधड़ा बगेची के तालाब का है जिसे फूलनाथ तालाब व बावड़ी बोला जाता है। यहां पिछले दिनों बीकानेर सेवा योजना के अध्यक्ष राजकुमार व्यास के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर श्रमदान किया गया तब पता चला कि इस तालाब व बावडी में पानी की आवक वाले रास्तों को कुछ कतिपय लोगों ने रोक रखा है। यदि सरकार समय रहते ऐसे लोगों पर एक्शन नहीं लेगी या पानी की आवक वाले रास्तों से अतिक्रमण नहीं हटाएगी तो मानसून के इस दौर में इस फूलनाथ तालाब व बावडी में पानी की आवक होनी मुश्किल है।

बीकानेर सेवा योजना के अध्यक्ष राजकुमार व्यास ने बताया कि बीकानेर परकोटे क़े मुंधड़ा चौक निवासी मुंधड़ा परिवार ने परकोटे की जनता की प्यास बुझाने हेतु यहां बावड़ी और तालाब क़े साथ महादेव मंदिर का निर्माण कराया था। इस जगह पर बीकानेर क़े संत फूलनाथ जी ने खूब तपस्या की इसलिए इसे फूलनाथ जी बगेची व तालाब पुकारा जाता है। यहां बरसों तक सावन में मेले भरा सकते थे मगर जब से पानी की आवक वाले रास्तों पर अतिक्रमण हुआ है तब से ये तालाब व अष्टकोणीय कलात्मक बावडी सूखी पड़ी रहती है। यहां बरसों पहले बरसाती पानी को सहेजने के लए पानी का एक गहरा कुंड बनाया, उस कुंड को भी इन कतिपय लोगो ने मिट्टी डलवाकर बंद क़र दिया। समाजसेवी राजकुमार व्यास ने बताया कि इस संबंध में मंदिर से जुड़े अनेक भक्तो ने जिला विकास प्राधिकरण क़े उच्च अधिकारियो को लिखित ज्ञापन देकर उनको अवगत करवाया मगर फिर भी पानी की आवक रोकने वाले लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। व्यास ने अब जिला प्रशासन सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से भी आग्रह किया कि वे इस प्राचीन धरोहर को मूल स्वरूप में बचाए रखने के लिए पानी की आवक रोकने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करें अन्यथा यहां श्रमदान का कोई महत्व नहीं रहेगा।

राजकुमार व्यास के नेतृत्व में फूलनाथ तालाब पर श्रमदान का फाइल फोटो