जिनवाणी श्रवण जीवन में परिवर्तन लाता है : डॉ. सुयशनिधि

धर्म-कर्म

24 तीर्थंकर तप साधना आराधक हुए सम्मानित

नागौर // श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ की ओर से पर्वाधिराज पर्युषण की आराधना के अंतर्गत मंगलवार को विभिन्न आयोजन हुए। 24 तीर्थंकर तप साधना करने वाले आराधकों का किस्तूरचंद, तन्मय अबानी परिवार की ओर से बहुमान किया गया। बुधवार को संवत्सरी महापर्व पर तप संपन्न होगा।

जयमल जैन पौषधशाला में समणी डॉ. सुयशनिधि ने प्रवचन में कहा कि जिनवाणी सुनने से शांति, संतोष, सद्बुद्धि, समृद्धि सहज में प्राप्त हो जाती है। परंतु यदि कोई असर व्यक्ति के जीवन में नहीं हो रहा है, तो कहीं न कहीं उसके श्रवण में कसर रहेगी। व्यक्ति को भूख लगती और भोजन करने पर भूख शांत हो जाती है। प्यास लगने पर पानी पीकर प्यास बुझाया जाता है। सिरदर्द हो तो दवाई से राहत मिल सकती है। लेकिन शारीरिक स्थिति में बदलाव लाना कोई बड़ी बात नहीं, आत्मा की स्थिति में बदलाव लाना अति आवश्यक है और महत्वपूर्ण भी। जिसके लिए जिनवाणी अहम भूमिका निभाती है। समणी सुगमनिधि ने संबोधित करते हुए कहा कि उदारता, मधुर वचन और विनम्रता जीवन को सुखमय बनाने की तीन महत्वपूर्ण यात्राएं हैं। उदारता केवल मानव तक सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति और पशु-पक्षी भी इसे अपने व्यवहार से दर्शाते हैं। कोई प्राणी यदि स्वयं भूखा रहकर भी दूसरों को भोजन कराए, तो यह उसकी विशालता कहलाती है। वहीं, यदि कोई व्यक्ति स्वयं खाए और दूसरों को भी खिलाए, तो यह उसकी सच्ची उदारता है। इसके विपरीत, जो स्वयं खाए लेकिन दूसरों को न खिलाए, वह कंजूस कहलाता है और जो न स्वयं खाए, न दूसरों को खाने दे, वह मक्खीचूस कहलाता है। इसलिए जीवन में सच्चा सुख तभी संभव है जब हम उदारता का भाव, मधुर वचन और विनम्रता के गुण को अपनाएं। संवत्सरी महापर्व पर अधिक से अधिक जप, तप, त्याग, उपवास, सामायिक, दया, पौषध आदि करने की प्रेरणा समणी वृंद ने दी।

13 व 7 उपवास के हुए प्रत्याख्यान

खुशी बांठिया ने 13 उपवास व चेन्नई की सपना ललवानी ने 7 उपवास की तपस्या के प्रत्याख्यान समणी वृंद से लिए। संघ की ओर से इनकी तपस्या का बहुमान मयूरी बोहरा व सपना ललवानी ने तपस्या की बोली लेकर किया। संचालन संजय पींचा ने किया। प्रवचन की प्रभावना का लाभ सविता अबानी, लीला देवी बैद व लालचंद ललवानी परिवार ने लिया। प्रवचन में पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर गौरांग नाहटा व गजल अबानी ने दिए। इन्हें सुरेशचंद, महेश कुमार कोठारी परिवार, चेन्नई निवासी के सौजन्य से रजत मेडल प्रदान किए गए। बोनस प्रश्नों के उत्तर विजया ललवानी व वीर सुराणा ने दिए, जिनको किस्तूरचंद अबानी परिवार की ओर से सम्मानित किया गया।

संघ मंत्री हरकचंद ललवानी ने बताया कि बुधवार को संवत्सरी महापर्व मनाया जाएगा। पांची देवी ललवानी ने 7 के प्रत्याख्यान लिए। इस दौरान महावीरचंद भूरट, प्रकाशचंद बोहरा, किशोरचंद ललवानी, सुरेश जैन आदि श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहें।