विक्रमादित्य ने प्रजा को किया था रोग मुक्त व ऋण मुक्त, इसलिए मनाते हैं विक्रम संवत : जानकीनारायण श्रीमाली

राजनीति

आरएसएस के लक्ष्मीनाथ महानगर इकाई की ओर से हुई हिन्दू नव वर्ष पर विचार संगोष्ठी

बीकानेर // जाने माने शिक्षाविद व इतिहासकार जानकी नारायण श्रीमाली ने कहा कि हमारा भारतीय नव वर्ष हर दृष्टिकोण से वैज्ञानिक है और प्रमाणिक है। इसे इसलिए मनाते हैं कि चक्रधारी सम्राट विक्रमादित्य के कार्यकाल में प्रजा रोग मुक्त व ऋण मुक्त हो गई थी और उस समय प्रजा को खुश रखा गया इसलिए ही भारतीय हिन्दू समाज विक्रम संवत मनाता है। ये परम्परा हजारों सालों से कायम है। वे सोमवार को बेसिक कॉलेज के सभागार में आरएसएस के लक्ष्मीनाथ महानगर इकाई की ओर से आयोजित नव वर्ष विचार संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।

इस अवसर पर जानकी नारायण श्रीमाली ने कहा कि ये हमारा सौभाग्य है कि सृष्टि की रचना करने वाले ब्रह्माजी ने भी राजस्थान की धरा पर अवतार लिया था इसलिए हम राजस्थान वालों को नव संवतसर के अलावा कोई नया वर्ष मनाना ही नहीं चाहिए मगर समाज में गुलामी के अंश आज भी मौजूद है। हम अंग्रेजी कलेण्डर के अनुसार आजकल एक जनवरी को नव वर्ष मना रहे हैं जो कतई उचित नहीं है। हमारा नव वर्ष वर्ष प्रतिपदा विक्रम संवत से शुरू होता है। उस समय प्रकृति भी हमारा वरण करती है इसलिए हमारा नव वर्ष हर दृष्टि से परिपूर्ण है और सटीक व प्रमाणिक है। श्रीमाली ने इस दौरान इतिहास की अनेक जानकारियां भी दी।

इस दौरान मंच पर मौजूद ज्योतिषाचार्य सुरेश कुमार आचार्य ने भारतीय काल गणना व ज्योतिषीय गणना के अनु़सार नव वर्ष की व्याख्या की। उन्होंने भी स्पष्ट किया कि हमारा नव वर्ष तो बंसत के दौरान ही होता है हमें कोई दुसरा नव वर्ष स्वीकार ही नहीं करना चाहिए। हमारा नव वर्ष तो साक्षेपगति से चलता है। भारत में कुल 12 संवतसर है मगर हम विक्रम संवत को ही सटीक मानते हैं क्योंकि यह हमारी ज्योतिषीय कालगणना के अनुसार एकदम प्रमाणिक है। ये अंग्रेजी कलेण्डर से बरसों पहले ही प्रभाव में आ गया था तब से ये लगातार जारी है और भारतीय समाज में इस दिन उत्साह की लहर देखी जाती है। इससे पहले मंचस्थ लक्ष्मीनाथ नगर के कार्यवाह ब्रह्मदत्त आचार्य ने विषय प्रवर्तन किया। आभार दुर्गाशंकर हर्ष ने जताया। मंच संचालन शिवकुमार व्यास ने किया।

ये रहे मौजूद

इस आयोजन में घनश्याम व्यास, एडवोेकेट राधेश्याम सेवग, उमेश व्यास, कैलाश आचार्य, महेंद्र कोठारी, महेश कुमार व्यास, राजेन्द्र ओझा, राजेन्द्र किराडू, आशा आचार्य, राजेश आचार्य, श्यामसुंदर जोशी, ज्येष्ठकांत सुथार, रामचन्द्र पुरोहित, ब्रजेंद्र पुरोहित व ओमप्रकाश श्रीमाली सहित अनेक लोग मौजूद रहे।