नौ दिवसीय श्रीरामचरितमानस नवाह्न पारायण महोत्सव का भव्य शुभारंभ

धर्म-कर्म

गोपेश्वर महादेव मंदिर से निकली भव्य कलश यात्रा, पूज्य श्री श्री 1008 क्षमाराम जी महाराज के श्रीमुख से बह रही श्रीराम भक्ति की अमृतधारा

बीकानेर। धर्मनगरी बीकानेर में सनातन संस्कृति, प्रभु श्रीराम की भक्ति और भारतीय धार्मिक परंपराओं की भव्य छटा बिखेरने के लिए नौ दिवसीय श्रीरामचरितमानस नवाह्न पारायण महोत्सव का शुभारंभ रविवार, 25 अक्टूबर को भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। इस धार्मिक महोत्सव को लेकर रामभक्तों एवं धर्मप्रेमी नागरिकों में उत्साह का वातावरण है। आयोजन के माध्यम से बीकानेर की पावन धरा पर श्रीराम नाम की महिमा, भक्ति की शक्ति और भारतीय संस्कारों के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

इस पावन आयोजन में पूजनीय श्री श्री 1008 श्री क्षमाराम जी महाराज, सिंथल पीठाधीश्वर के श्रीमुख से श्रीरामचरितमानस के नवाह्न पारायण एवं पाठ का श्रवण करने का पुण्य अवसर प्राप्त हुआ। नौ दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक चिंतन, भक्ति, श्रद्धा और धर्ममय वातावरण से जुड़ने का विशेष अवसर रहेगा।

भव्य कलश यात्रा से हुआ महोत्सव का मंगलमय आगाज

महोत्सव के प्रथम दिन रविवार, 25 अक्टूबर को गोपेश्वर महादेव मंदिर से भव्य कलश यात्रा कलश यात्रा श्रद्धा एवं धार्मिक उत्साह के साथ कथा स्थल माली समाज भवन, शिव पार्वती मंदिर, गोपेश्वर बस्ती पहुंची। कलश यात्रा भारतीय सनातन परंपरा में मंगल, पवित्रता और शुभता का प्रतीक है। इस पावन यात्रा के माध्यम से प्रभु श्रीराम के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए धार्मिक महोत्सव का शुभारंभ किया गया। जय श्रीराम के जयघोष, भक्तिभाव और सामूहिक सहभागिता से आयोजन को भव्य एवं मंगलमय बनाने का आह्वान को सफल बना दिया।

पूज्य क्षमाराम जी महाराज के श्रीमुख हुआ श्रीरामचरितमानस का अमृतमय पाठ

आयोजन से जुड़े गोपाल अग्रवाल ने बताया कि नौ दिवसीय श्रीरामचरितमानस नवाह्न पारायण महोत्सव 26 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026 तक आयोजित होगा। प्रतिदिन कथा एवं पारायण का कार्यक्रम शुरू हुआ। पूज्य श्री श्री 1008 श्री क्षमाराम जी महाराज के श्रीमुख से श्रीरामचरितमानस की अमृतमयी वाणी का श्रवण श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि श्रीरामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि व्यक्ति को सही दिशा देने वाला आदर्शों और संस्कारों का अनुपम स्रोत है। प्रभु श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा, करुणा, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। माता-पिता के प्रति सम्मान, गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, परिवार के प्रति दायित्व और समाज के प्रति सेवा भाव जैसे जीवनमूल्य श्रीरामचरितमानस के माध्यम से जन-जन तक पहुंचते हैं।

इस महोत्सव का उद्देश्य धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ समाज में सदाचार, सद्भाव, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना है। सनातन संस्कृति, भक्ति और सामाजिक समरसता का संदेश देने का यह सार्थक प्रयास है। आज के व्यस्त जीवन में धार्मिक आयोजन व्यक्ति को आत्मचिंतन, आध्यात्मिक शांति और अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। श्रीरामचरितमानस पारायण जैसे आयोजन से नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं एवं संस्कारों से परिचित कराने और समाज में धार्मिक चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है।