



एमजीएसयू में 146वीं जयंती पर विशेष व्याख्यान, राजपरिवार की प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी ने साझा किए कम चर्चित प्रसंग
बीकानेर // महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में मंगलवार को आधुनिक बीकानेर के निर्माता महाराजा गंगा सिंह जी की 146वीं जयंती पर विशेष व्याख्यान एवं समारोह आयोजित किया गया। महर्षि कण्व भवन के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में महाराजा गंगा सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व, प्रशासनिक दक्षता, जनकल्याणकारी कार्यों और शिक्षा के प्रति उनके दृष्टिकोण को याद किया गया। बीकानेर राजपरिवार की प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी मुख्य अतिथि रहीं, जबकि प्रख्यात विद्वान जानकी नारायण श्रीमाली ने मुख्य वक्ता के रूप में महाराजा गंगा सिंह के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने की।

मुख्य वक्ता श्रीमाली ने कहा कि महाराजा गंगा सिंह केवल बीकानेर के शासक नहीं, बल्कि दूरदर्शी प्रशासक, कुशल कूटनीतिज्ञ और जनकल्याण के पक्षधर नेतृत्वकर्ता थे। उनकी विकासपरक नीतियों ने बीकानेर को नई दिशा दी और राज्य की पहचान को व्यापक स्तर पर स्थापित किया। उन्होंने आधुनिक संस्थाओं के विकास, शिक्षा, सामाजिक उन्नति और जनहित से जुड़े कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराजा गंगा सिंह की दूरदर्शी सोच आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों से ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का मूल्यांकन तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर करने का आह्वान किया।
राज्यश्री कुमारी ने साझा किए आत्मीय प्रसंग
मुख्य अतिथि प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी ने महाराजा गंगा सिंह के जीवन से जुड़े आत्मीय और कम चर्चित प्रसंग साझा किए। उन्होंने उनके व्यक्तित्व के मानवीय पक्ष, कार्यशैली और दूरदर्शिता से जुड़े संस्मरण सुनाए। इन प्रसंगों के माध्यम से विद्यार्थियों को महाराजा गंगा सिंह के व्यक्तित्व को ऐतिहासिक उपलब्धियों से आगे बढ़कर समझने का अवसर मिला।
विरासत से प्रेरणा लेकर समाज के विकास में योगदान दें विद्यार्थी
कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि महाराजा गंगा सिंह का जीवन दूरदर्शी नेतृत्व, प्रशासनिक दक्षता और जनकल्याण के प्रति समर्पण का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा देने वाली संस्था नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है। विद्यार्थियों को महाराजा गंगा सिंह के जीवन से प्रेरणा लेकर अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करनी चाहिए।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. प्रभुदान चरण ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन सह अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संतोष कंवर शेखावत ने किया। अंत में वित्त नियंत्रक देवेंद्र सिंह राठौड़ ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रो. अनिल छंगाणी, प्रो. राजाराम चोयल, डॉ. बिट्ठल बिस्सा, डॉ. गौतम कुमार मेघवंशी, डॉ. धर्मेश हरवानी, डॉ. प्रगति सोबती, डॉ. फौजा सिंह, डॉ. मानकेशव सैनी, डॉ. उमेश शर्मा सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।



