शरद संगत में कविता, गीत, गजल और भजनों ने बांधा समांशरद पूर्णिमा की चांदनी में सजी साहित्य और संगीत की महफिल, 25 रचनाकारों ने दी मनोहारी प्रस्तुतियां

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बीकानेर // शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी और मृदुल ज्योत्स्ना के बीच कविता, शायरी, गीत, गजल और भजनों की मधुर प्रस्तुतियों ने शरद संगत कार्यक्रम को यादगार बना दिया। दक्ष सिक्योर सर्विसेज और फेडरेशन एनएलजेसीएफ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के साहित्यकारों, कवियों और गायक कलाकारों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। साहित्य और संगीत से सजी इस महफिल में कहीं शब्दों की संवेदनाएं मुखर हुईं तो कहीं सुरों की मिठास ने वातावरण को संगीतमय बना दिया।

कार्यक्रम के संयोजक शशांक शेखर जोशी ने बताया कि बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाने और यहां के सृजनशील लोगों की प्रतिभा को मंच देने के उद्देश्य से पिछले चार वर्षों से शरद पूर्णिमा की रात शरद संगत का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन के माध्यम से शहर की साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रतिभाओं को एक साझा मंच मिलता है, जहां वे अपनी मौलिक रचनाओं और कलात्मक प्रस्तुतियों के जरिए अपनी अभिव्यक्ति को श्रोताओं तक पहुंचाते हैं।

ऐसे आयोजन इंसान की संवेदनाओं को उभारते हैं- नागपाल

कार्यक्रम में अतिथि के रूप में शामिल सीके बिरला अस्पताल के असिस्टेंट मार्केटिंग मैनेजर जितेश नागपाल ने कहा कि ऐसे आयोजन इंसान की संवेदनाओं को उभारते हैं और समाज को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। साहित्य और संगीत मनुष्य को भावनात्मक रूप से जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन शहर की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने के साथ-साथ सामाजिक जुड़ाव को भी मजबूत बनाते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई। इसके बाद राजनारायण पुरोहित ने अपनी प्रस्तुति दी। भरत व्यास के प्रसिद्ध गीत ‘तुम गगन के चंद्रमा हो’ की प्रस्तुति ने महफिल में खास समां बांध दिया। एक के बाद एक प्रस्तुतियों के साथ श्रोताओं ने कविता, शायरी, गीत, गजल और भजनों का आनंद लिया। शरद पूर्णिमा की चांदनी के बीच सजी यह संगीतमय शाम बीकानेर की साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा का खूबसूरत उदाहरण बनी।

इन रचनाकारों ने दी अपनी अपनी प्रस्तुतियां

कार्यक्रम में आनंद मस्ताना, गोपाल पुरोहित, राजेंद्र जोशी, अमित गोस्वामी, मोनिका गौड़, मनीषा आर्य, संजय आचार्य वरुण, नवल व्यास, राजाराम स्वर्णकार, पुखराज, गौरीशंकर सोनी, राजनारायण पुरोहित, विप्लव व्यास, योगेश व्यास, समीर गोयल, दीपेंद्र सिंह, जुगल पुरोहित, नमामीशंकर आचार्य, बाबूलाल छंगाणी, कैलाश टाक, गौरीशंकर प्रजापत, अजय जोशी, राजेंद्र स्वर्णकार, इरशाद अजीज तथा रेणुका व्यास नीलम तथा हरीश बी शर्मा ने अपनी रचनाओं और प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को साहित्यिक रंगों से सराबोर किया।

ये भी रहे मौजूद

इस अवसर पर सुरेंद्र सिंह शेखावत, सिंथेसिस के निदेशक मनोज बजाज, शक्ति रतन रंगा, मनोज व्यास, जयकिशन रामावत, एडवोकेट अशोक मारू, राजेश बिश्नोई, रचना रंगा सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।