रोड लाइट और चांदनी में अभ्यास कर बने हॉकी के जादूगर, ध्यानचंद के संघर्षों से रूबरू हुई नई पीढ़ी

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राष्ट्रीय खेल दिवस पर परफेक्ट चेस अकादमी में परिचर्चा; 15 खिलाड़ियों से एक साथ भिड़े अनिल बोड़ा

बीकानेर // राष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को स्थानीय परफेक्ट चेस अकादमी में परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जीवन, संघर्ष, देशप्रेम और खेल के प्रति समर्पण के प्रेरणादायी प्रसंगों से नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को रूबरू कराया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शतरंज पदाधिकारी एडवोकेट एस.एल. हर्ष ने की।

अंतरराष्ट्रीय रेटेड शतरंज खिलाड़ी अनिल बोड़ा ने ध्यानचंद के संघर्षपूर्ण खेल जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने अभ्यास में कभी कमी नहीं आने दी। रोड लाइट और चांदनी रात में भी कड़ी ड्रिबलिंग और अभ्यास करने के प्रसंग बताते हुए उन्होंने कहा कि ध्यानचंद ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।

एडवोकेट एस.एल. हर्ष ने ध्यानचंद के देशप्रेम से जुड़ा प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने जर्मनी में एडोल्फ हिटलर के प्रस्ताव को ठुकराकर देश के प्रति अपनी निष्ठा को सर्वोपरि रखा। उन्होंने कहा कि ध्यानचंद का जीवन खिलाड़ियों के लिए केवल खेल की उत्कृष्टता ही नहीं, बल्कि देशभक्ति और चरित्र निर्माण की भी प्रेरणा देता है।

कोच कपिल पंवार ने ध्यानचंद के बचपन और शुरुआती जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने छोटी उम्र से ही स्वयं को खेल के लिए तैयार करना शुरू कर दिया था। वहीं रविकांत मारू ने उनके नियमित अभ्यास और अनुशासन के प्रसंग साझा करते हुए खिलाड़ियों को निरंतर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।

परिचर्चा के बाद अनिल बोड़ा ने एक साथ 15 खिलाड़ियों के साथ शतरंज का मुकाबला खेला। इस अनोखे मुकाबले में अकादमी के नन्हे खिलाड़ियों ने भी उत्साह और आत्मविश्वास के साथ मुकाबला किया।

कार्यक्रम में बताया गया कि राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर अगले वर्ष से जिला स्तरीय इमामी शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा। आयोजकों ने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य खेलों के प्रति नई पीढ़ी में रुचि बढ़ाने के साथ-साथ महान खिलाड़ियों के जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर उपलब्ध कराना है।