परिवारों में एकता व राष्टीयता की भावना जरूरी : जोशी

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निम्बोला में कुटुम्ब प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित

खींवसर // परिवारों में एकता और राष्ट्रीयता की भावना जाग्रत होने पर ही राष्ट्र शक्तिशाली बनेगा। असल में कुटुंब ही आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक इकाई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक नंदलाल जोशी बाबाजी ने यह बात कही। वे ग्राम पंचायत भुण्डेल के निम्बोला में संघ की कुटुंब प्रबोधन गतिविधि के अंतर्गत नागौर रामद्वारा के महंत जानकीदास महाराज तथा आकाशदीप आश्रम के स्वामी राम निरंजन तीर्थ के सानिध्य में आयोजित कुटुम्ब प्रबोधन कार्यक्रम में बोल रहे थे। शिक्षाविद् और दार्शनिक बाबाजी ने कहा कि विदेशों में भी भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार हो रहा है, अनेक विदेशी लोग भारतीय संस्कृति की प्रशंसा कर रहे हैं। विदेशों में खासकर अमेरिकी संसद में मां सरस्वती की पूजा-अर्चना इसका उदाहरण है।
परम्पराओं व संस्कृति से जुड़े रहें
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को सबसे पहले संस्कार अपने परिवार से ही मिलते हैं। समाज को सुसंस्कृत, चरित्रवान, राष्ट्र के प्रति समर्पित और अनुशासित बनाने में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए संघ का प्रयास है कि स्वयंसेवकों के परिवारों को भारतीय संस्कृति की मूल अवधारणाओं से जोड़कर समाज को सशक्त बनाया जाए। लोगों को अपनी परंपराओं और संस्कृति से जुड़े रहने के लिए अपनी मूल भाषा, भूषा, भजन और भोजन को अपनाना होगा।
परिवारों के बीच परस्पर सहयोग हो
उन्होंने कहा कि हमें विभिन्न जातियों, पंथ, भाषाओं और क्षेत्रों के परिवारों के साथ मित्रवत संबंध बनाकर उनके साथ नियमित रूप से मिलन, भोजन और चर्चा के कार्यक्रम करने चाहिए जिससे समाज में सामाजिक समरसता का संदेश जाए। सप्ताह में कम से कम एक दिन अपने परिवार और मित्र परिवारों के साथ बैठकर भोजन करने के अलावा राष्ट्र और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों पर चर्चा करनी चाहिए। सक्षम, संपन्न और वंचित परिवारों के बीच परस्पर सहयोग होने पर कई सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का स्वतः निराकरण हो जाएगा। उन्होंने कहा कि धरती के बिना कुछ भी नहीं है। धरती को मां कहा गया है इसलिए बड़ों व धरती का वंदन जरूरी है। सत्संग में एक ही जाजम पर सब भेदभाव भुलाकर बैठते हैं। सबका ध्यान जा रहा है। विश्व का ध्यान भारत की ओर है। आज दुनिया के हर कोने में मिलेगा। इन दिनों महाकुम्भ में विदेशी भी आ रहे हैं उनको भी भारतीय संस्कृति का सिद्धांत वैज्ञानिक लग रहा है।

बाहर भी अपनायत से रहें

विभिन्न प्रसंगों पर हम मिलजुलकर कई चीजें सीखा देते हैं। आपस में खटपट नहीं रखने का संकल्प ले ताकि नवीन पीढ़ी हमसे अच्छी बनकर आएगी। प्रसंग एक निमित है। आपस के प्रेम प्रसंगों की वजह से सब आपस में जुड़ते हैं। जागृत सुखी समाज का निर्माण होता है। व्यवस्था में परिवर्तन भी आता है। बेशक कमाई के लिए बाहर जाएं लेकिन माटी की जड़ों से जुड़ें रहें। अपनों को भूले नहीं। बाहर जाकर भी अपने गांव की अपनायत सबको दिखाएं। जहां भी रहे अपनायत से रहें।

हर एक के प्रति सद्भावना बनी रहे
बबाबाजी ने कहा कि काम को तपस्या मानो तभी आप जीवन में आगे बढ़ सकते हैं। सबसे दुर्लभ मनुष्य जीवन है। मनुष्य अपनी मर्यादा में रहकर काम करें। मनुष्य जीवन अनमोल है। बड़ो के साथ रहकर अपनी योग्यता में निखार लाएं। मनुष्य जीवन में शिक्षा व संस्कार दोनों जरूरी है। नित्यकरें धरती मां वंदन… व मिनख जमारो पायो पुण्य रत्न धन..सत मार्ग पर राख अडिग मन …की प्रस्तुति देते हुए कहा कि मधुर वाणी से पराए भी अपने हो जाते हैं। हर एक के प्रति सद्भभावना बनी रहे।

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में संघ के सह प्रांत प्रचारक राजेश कुमार, प्रांत सेवा प्रमुख नटवर राज, प्रांत घोष प्रमुख रामचंद्र बालवा, शताब्दी विस्तारक रुद्र कुमार शर्मा, समाजसेवी हरिराम धारनिया, कुटुंब प्रबोधन के विभाग संयोजक भवानी सिंह सिंगड़, संघ के जिला प्रचारक राजेश, गजेंद्र गौड़, विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री मेघराज राव, तेजाराम कड़ेला, धनाराम कड़ेला, भजन गायक मगाराम बारूपाल, डॉक्टर धीरेंद्र शर्मा,पदमाराम दुगेसर, सरपंच धर्मेंद्र गौड़, हनुमान सिंह देवड़ा, बाबूलाल भैंसपालिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। तेजाराम कड़ेला ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन सुखराम चौधरी ने किया।