



रामकथा में गूंजे भक्ति गीत, अत्रि-अनुसूया प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
बीकानेर। सीताराम गेट स्थित सीताराम भवन में आयोजित श्री रामकथा अमृतोत्सव में शुक्रवार को श्रद्धा, भक्ति और रामनाम की रसधारा बही। कथावाचक पंडित पुरुषोतम व्यास मीमांशक ने भगवान श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण के अत्रि मुनि एवं अनुसूया मिलन, चित्रकूट प्रवास सहित अनेक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। भक्तिगीतों, चौपाइयों और मंत्रोच्चारण से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।

पुरुषोत्तम व्यास मीमांशक ने सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ तथा “श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन…” जैसी स्तुतियों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। उन्होंने कहा कि सांसारिक दिखावे और भौतिक सुखों से ऊपर उठकर प्रभु भक्ति में लीन रहना ही जीवन का वास्तविक सत्य है। रामकथा हमें मर्यादा, धर्म, प्रेम और कर्तव्यपरायणता का संदेश देती है।
उन्होंने भजन “अब सौंप दिया है इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में…” सुनाते हुए कहा कि काम, क्रोध और लोभ का त्याग कर जब मनुष्य पूर्ण समर्पण भाव से प्रभु की शरण में जाता है, तब भगवान स्वयं भक्त की ओर कदम बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु राम नाम का धन जिसके पास है, वही संसार का सबसे बड़ा धनवान है।
कथावाचक ने “ये मन बड़ा चंचल है, कैसे तेरा भजन करूं…” भक्ति गीत के माध्यम से बताया कि चंचल मन को निष्काम भक्ति और एकाग्रता से नियंत्रित किया जा सकता है। वहीं गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के अरण्यकांड प्रसंग में सती अनुसूया द्वारा पतिव्रता धर्म के वर्णन को विस्तार से समझाया। उन्होंने दोहा “धीरज, धर्म, मित्र अरु नारी, आपद काल परखिए चारी” सुनाते हुए कहा कि व्यक्ति के धैर्य, धर्म, मित्र और नारी की पहचान विपत्ति के समय ही होती है।
कथा 24 मई तक प्रतिदिन दोपहर 12:30 बजे से 3:30 बजे तथा शाम 4 बजे से 7 बजे तक आयोजित होगी। कथा का लाभ श्रीमती पुष्पा देवी सोमानी एवं समस्त सोमानी परिवार द्वारा लिया जा रहा है।
25 मई से शुरू होगा ‘नानी बाई रो मायरो’
सीताराम भवन में 25 से 27 मई तक संगीतमय “नानी बाई रो मायरो” कथा का आयोजन होगा। कथा का वाचन वृंदावन के पंडित देवेश दीक्षित महाराज करेंगे।



