


138 साल बाद 2025 में चंचल हर्ष परिवार ने कराई थी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा
श्रद्धालुओं ने की आरती और बाबा से सुख-समृद्धि की कामना
बीकानेर // नाथूसर गेट के बाहर हर्षो की समाधि स्थल में उदयगिरि जी महाराज की दिव्य प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा का एक वर्ष पूर्ण होने पर बुधवार को विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक एवं महाआरती का आयोजन किया गया। इस दौरान समूचा मंदिर परिसर दिनभर अभिषेक जे मंत्रोच्चार से व जयकारों से गूंजता रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ उठाया।
आकाशवाणी बीकानेर के जाने-माने उद्घोषक रहे स्व चंचल हर्ष के परिवार द्वारा स्थापित इस प्रतिमा के समक्ष सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की।
इस अवसर पर उदयगिरि जी महाराज के परम भक्त एवं क्यूबिशन कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर-प्रिंसिपल चंद्रेश हर्ष ने कहा कि उनके परिवार के लिए यह अत्यंत सौभाग्य और गर्व का विषय है कि 138 वर्षों के बाद बाबा की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा कराने का अवसर उन्हें प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि आज यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां आने वाले भक्त सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं और बाबा की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
विशेष पूजा के बाद आरती और प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन में करनीदान हर्ष, हरि नारायण हर्ष, रामकुमार पुरोहित, दाऊलाल छंगाणी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
यहां बड़ी संख्या में पंहुचे भक्तों से बातचीत में समाजसेवी भामाशाह चंद्रेश हर्ष ने कहा कि – “आज का दिन हमारे परिवार के लिए अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण है। ठीक एक वर्ष पूर्व हमें 138 वर्षों के बाद बाबा उदयगिरि जी महाराज की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कार और सेवा का संकल्प था। पिछले एक वर्ष में हमने हजारों श्रद्धालुओं को यहां श्रद्धा के साथ बाबा के दर्शन करते देखा है। बाबा के प्रति लोगों की अटूट आस्था इस स्थान को एक तीर्थ के रूप में स्थापित कर रही है। हमारी कामना है कि बाबा की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे, सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो। हम आगे भी इसी भावना के साथ सेवा और धर्म के कार्यों में निरंतर योगदान देते रहेंगे।”



